पांच दिन की खुशी के बाद शिवानी की जिंदगी में ऐसा काल आया कि उसकी दुनिया ही उजड़ गई। विजय और शिवानी की शादी को सिर्फ पांच ही दिन हुए थे। रविवार को खुशी- खुशी दोनों के परिवार यमुना मैया का आशीर्वाद लेने बागपत पहुंचे थे। अचानक एक झोंका आया और शिवानी की खुशियों को उजाड़ कर ले गया। इस भयानक हादसे के बाद विजय का परिवार और पत्नी सदमे में हैं।
एक पल में उजड़ गई शिवानी की दुनिया, रह गया जिंदगीभर का गम... देखें तस्वीरें
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बागपत में अवैध रेत खनन के चलते यमुना नदी में बने एक गड्ढे ने शादी के पांच दिन बाद ही एक नव विवाहिता की मांग उजाड़ दी। यमुना में डूब रहे भतीजे को बचाने के प्रयास में उनके पति गड्ढे के भंवर में फंस गए। भतीजे को तो उन्होंने बाहर निकाल दिया, लेकिन खुद डूब गए।
बिनौली थाना क्षेत्र के गांव सिरसली निवासी विजय वाल्मीकि पुत्र स्व. जिले सिंह का परिवार दिल्ली के रघुवीरनगर में रहता है। विजय की पांच दिन पहले बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर) निवासी शिवानी से शादी हुई थी। रविवार को विजय, नवविवाहिता पत्नी शिवानी और परिजन बागपत के यमुना नदी में पक्का घाट पर स्नान और पूजा करने के लिए आए थे। इस दौरान विजय का भतीजा अन्नू डूबने लगा, विजय ने उसे तो किसी तरह बाहर निकाल दिया, लेकिन खुद डूब गए।
बड़े भाई ने पाल-पोसकर किया था बड़ा
विजय पांच भाइयों में सबसे छोटा था। सबसे बड़ा भाई बालेश, उससे छोटा राजेश, ब्रजेश, बबलू व सबसे छोटा विजय था। भाई राजेश ने बताया कि माता-पिता की मौत के बाद उसने ही विजय का पालन पोषण किया है। हम ही उसे माता-पिता थे। वे सिरसली के रहने वाले हैं, लेकिन कई वर्ष पहले परिवार सहित दिल्ली में जाकर बस गए थे।
भाई बेहोश, परिवार बेहाल
विजय यमुना में खनन के गड्ढ़ों में जिंदगी और मौत से जूझ रहा था। किनारे पर परिवार बिलख रहा था। लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। करीब दो घंटे बाद विजय का शव बाहर निकाला गया तो बड़ा भाई राजेश बेहोश हो गया। पत्नी को किसी तरह किनारे से उठाकर ले जाया गया। अपनी जेठानी व ननद से लिपट कर पति की मौत पर रो रही थी।
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