यदि आप मेरठ में हैं और पेट्रोल पंप से पेट्रोल व डीजल लेकर निश्चिंत हो जाते हैं तो ये खबर आपके लिए है। क्योंकि पुलिस ने मंगलवार को नकली पेट्रोल- डीजल बनाने वाली फैक्ट्रियों का पर्दाफाश कर गिरोह के दस सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की साठगांठ से मेरठ महानगर में तेल माफिया खुलकर चांदी काट रहे हैं।
यूपी: नकली पेट्रोल-डीजल बनाने की फैक्ट्री का पर्दाफाश, 2.10 लाख लीटर तेल बरामद, 10 गिरफ्तार
तेल माफिया राजीव जैन व प्रदीप गुप्ता के पास केमिकल और थिनर का लाइसेंस है, जिसकी आड़ में नकली पेट्रोल और डीजल बनाते थे। करीब दस साल से दोनों तेल माफिया का धंधा चल रहा था।
प्रदीप गुप्ता ने परतापुर के डुंगरावली गांव स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में गणपति पेट्रो के नाम से फैक्ट्री चला रखी थी। राजीव जैन ने एनएच-58 स्थित वेदव्यासपुरी में पारस केमिकल के नाम से फैक्ट्री खोली थी। दोनों की परतापुर और टीपीनगर पुलिस से साठगांठ थी।
दोनों का अवैध कारोबार इतना फैला हुआ था कि रोजाना पांच-छह टैंकर नकली पेट्रोल-डीजल तैयार होकर सप्लाई होता था। पुलिस के मुताबिक शहर में कई पेट्रोल पंप निर्धारित थे, जहां पर नकली पेट्रोल-डीजल से भरे टैंकर जाते थे।
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने उक्त पेट्रोल पंपों के नाम बताए हैं। जिसके बाद पुलिस ने इस मामले की जानकारी भारतीय पेट्रोलियम कारपोरेशन को भी दे दी है। ताकि इन पेट्रोल पंपों पर भी संबंधित विभाग कार्रवाई कर सके।
10 पेट्रोल पंपों के नाम उजागर
पुलिस के मुताबिक शहर में करीब 10 पेट्रोल पंप हैं, जिनको नकली पेट्रोल-डीजल जाता था। पकड़े गए आरोपियों ने उक्त पेट्रोल पंपों के नाम पुलिस को बताए हैं।
टीपीनगर और परतापुर इलाके में कई पेट्रोल पंप की पुलिस ने रात में जांच पड़ताल भी की। जहां पर थिनर और सॉल्वेंट से बना नकली पेट्रोल और डीजल मिलना बताया है।
20 लीटर थिनर और केमिकल के मिश्रण में 50 ग्राम रंग मिलते ही पेट्रोल बन जाता है। आरोपियों ने छापामारी के दौरान पुलिस टीम को नकली पेट्रोल-डीजल भी बनाकर दिखाया।
इसी तरह से वह बड़े-बड़े ड्रम में पेट्रोल-डीजल बनाते हैं। एक टैंकर पेट्रोल-डीजल बनाने में 10 से 15 मिनट का समय लगता है। उसके बाद वह नकली पेट्रोल-डीजल पेट्रोल पंपों पर सप्लाई होता है। इसका वीडियो भी वायरल हो गया।