उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में डेढ़ लाख का इनामी संजीव पकौड़ी शनिवार रात सरूरपुर स्थित कक्केपुर के जंगल में मुठभेड़ में मारा गया। पुलिस के अनुसार संजीव प्रधान कविता की हत्या करने के लिए शनिवार को तीन साथियों के साथ गांव में पहुंचा था। उसने कविता पर गोलियां चला दीं।
मुठभेड़ में ढेर: ग्राम प्रधान कविता को बर्बाद करने की ठान चुका था शूटर संजीव पकौड़ी, ऐसे बना कुख्यात
मेरठ के सरूरपुर खुर्द निवासी संजीव पकौड़ी ने ऊधम सिंह से दोस्ती कर जरायम की दुनिया में कदम रखने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। साल 2010 में पंचायत चुनाव में ही संजीव और उसके भाई संजय का अपने ही गांव के नीटू उर्फ रमेश से विवाद हो गया था। जिसके बाद संजीव ने ऐलान किया था कि एक दिन वह नीटू और उसकी पत्नी कविता के पूरे परिवार को तबाह कर देगा। सरूरपुर खुर्द की गांव प्रधान कविता के साथ हुआ भी यही कि उसका सब कुछ ही बर्बाद हो गया।
पुलिस के अनुसार संजीव पकौड़ी का करनावल निवासी ऊधम सिंह के यहां आना जाना था। ऊधम का नाम लेकर ही संजीव ने नीटू को धमकी दी थी। बाद में ऊधम सिंह और योगेश भदौड़ा के बीच गैंगवार शुरू हुई।
31 अक्तूबर 2011 को कुख्यात ऊधम सिंह ने भदौड़ा गांव में एक कार्यक्रम में योगेश भदौड़ा के भाई प्रमोद भदौड़ा की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। जिसके बाद ऊधम सिंह जेल चला गया। लेकिन नीटू उर्फ रमेश ने समझा कि शायद अब संजीव पकौड़ी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा।
21 नवंबर 2012 को सरधना में गांव प्रधान कविता के पति नीटू उर्फ रमेश की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। जिसके बाद एसटीएफ और क्राइम ब्रांच ने कुख्यात संजीव पकौड़ी और उसके भाई संजय की गिरफ्तारी के लिए जाल बिछाया।
लेकिन संजीव मोबाइल का प्रयोग न करने के कारण पुलिस की पकड़ में नहीं आया। नीटू उर्फ रमेश की हत्या में भाई परविंदर गवाह और वादी था। जिसको कई बार धमकी दी गई कि यदि हत्या में समझौता नहीं किया तो अंजाम ठीक नहीं होगा।
इस वारदात के बाद सरूरपुर खुर्द में बखेड़े के बाद कई दिन तक पीएसी तैनात रही। अपने दूसरे पति को खोने के बाद कविता को लगातार धमकी मिल रहीं थी। दो साल पहले एसटीएफ ने संजीव के दूसरे भाई संजय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जो जेल में बंद है।