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द्रोपदेश्वर महादेव मंदिर: यहां सिमटे हुए हैं 7200 साल पुराने कई बड़े रहस्य, तस्वीरें भी देखिए

Tue, 19 Jan 2021 06:29 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Tue, 19 Jan 2021 06:29 PM IST
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Do you know the history of Draupeshwar Mahadev Temple in Hastinapur
हस्तिनापुर स्थित द्रोपदेश्वर महादेव मंदिर। संवाद - फोटो : अमर उजाला

इस कड़ी में आपको लगभग 7200 वर्ष पुराने ऐसे स्थान के बारे में बताते हैं, जहां कौरवों और पांडवों के बाल्यकाल बीता। इसे द्रोपदेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। मंदिर में शिवलिंग स्थापित है। 



महान चंद्रवंश के प्रतापी राजा यदु, दुष्यंत, भरत, शांतनु व भीष्म पितामह आदि ने इसी शिवलिंग की पूजा-अर्चना कर कुरु वंश की कीर्ति अर्जित की थी। इसी पवित्र स्थान पर महर्षि वेदव्यास आदि मुनियों ने तपस्या कर सनातन धर्म की ख्याति पूरे संसार में फैलाई थी।

Do you know the history of Draupeshwar Mahadev Temple in Hastinapur
हस्तिनापुर में मंदिर - फोटो : अमर उजाला

मान्यता है कि इसी स्थान पर बाल्यकाल में कौरवों और पांडवों को अस्त्र-शस्त्र और राजनीतिक ग्रंथों का अध्ययन कराया गया था। वहीं द्रोपदी प्रतिदिन इसी स्थान पर भगवान महादेव की पूजा और महर्षि वेदव्यास की वंदना कर आशीर्वाद प्राप्त करती थीं। भगवान श्रीकृष्ण के चरणों से यह स्थान अनेक बार पवित्र हुआ।

Do you know the history of Draupeshwar Mahadev Temple in Hastinapur
हस्तिनापुर स्थित द्रोपदेश्वर महादेव मंदिर। संवाद - फोटो : अमर उजाला

मंदिर के नाम लगभग 15 बीघा जमीन है। इसके बाद भी मंदिर का विकास नहीं हो सका। यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों के रहने-खाने और ठहरने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। विद्युत व्यवस्था तक नहीं की गई है। पर्यटन विभाग ने भी यहां कोई कार्य नहीं कराया है। कागजों पर हुए कामों के बारे में किसी को जानकारी नहीं है।  

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प्राचीन स्थान का इतिहास - फोटो : अमर उजाला

भीष्म पितामह से मिलने आती थीं मां गंगा 
द्रोपदेश्वर महादेव मंदिर के अध्यक्ष अनिल सारस्वत ने बताया कि मंदिर के समीप नक्तखाल नामक स्थान है। मान्यता है कि भीष्म पितामह जब भी व्याकुल हो जाते थे तो वह मां गंगा को याद करते थे। मां गंगा भी इसी स्थान पर प्रकट होती थी। आज यह स्थान गंगा मंदिर के नाम से विख्यात है।

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मंदिर में शिवलिंग - फोटो : अमर उजाला

दुर्योधन ने भीम को कुंड में फेंका था 
नक्तखाल में ही दुर्योधन ने भीम को मारने की योजना बनाई थी। जहर के लड्डू देकर इसी गहरे कुंड में फेंक दिया था। जहां से भीम जीवित होकर निकल गए थे। कुंड में आज भी विषैले सांप मौजूद बताए जाते हैं। कुंड की गहराई का आज तक किसी को अंदाजा नहीं लग सका है।

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