फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

खाप पंचायत के फरमानों से बेपरवाह हैं ये बेटियां, अपने हौसले से बदल दिए फैसले

Fri, 13 Dec 2019 02:15 PM IST
कपिल kapil रैना पालीवाल, अमर उजाला, बागपत
रैना पालीवाल, अमर उजाला, बागपत Published by: कपिल kapil Updated Fri, 13 Dec 2019 02:15 PM IST
विज्ञापन
Daughters of Baghpat are moving in every field and she is not accepting decisions of Khap Panchayats
बागपत की बेटियां - फोटो : अमर उजाला

बेटियों के पैरों में बांधता आया है समाज कई तरह की बेड़ियां, जकड़ता रहा है उन्हें अनचाहे बंधनों में। कसता रहा है उन पर रूढ़िवादी सोच की लगाम। पशुओं की तरह हांकता रहा है उन्हें। समाज जो पुरुषों का है, जहां उन्हीं की सत्ता है। उनके नियम और उन्हीं के कायदे। उनकी प्रतिष्ठा और उनके फायदे हैं... आगे पढ़िए, खाप पंचायतों के फैसलों को कैसे मात दे रहीं बेटियां-

loader
Daughters of Baghpat are moving in every field and she is not accepting decisions of Khap Panchayats
काजल - फोटो : अमर उजाला
जहां बेटियों की बात होती है वहां समाज आधुनिक होकर भी आदिम बन जाता है। जो तय करता है बेटियों के अधिकार, आजादी पर वक्त बदल रहा है। बेड़ियां तोड़कर बेटियां उड़ चली हैं आसमां में। रोकने की ताकत नहीं अब जहां में। बागपत की बावली ग्राम सुधार समिति ने 2016 में पंचायत की जिसमें समाज सुधार के नाम पर लड़कियों के जींस पहनने और मोबाइल रखने पर पाबंदी लगा दी गई थी। गांव की मुखर लड़कियों ने पंचायत के इस फरमान को फाड़कर फेंक दिया। वे निडर होकर जींस, प्लाजो, लैगिंग पहनती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Daughters of Baghpat are moving in every field and she is not accepting decisions of Khap Panchayats
बागपत की बेटी - फोटो : अमर उजाला
समाज में बेटियों पर होने वाली हिंसा के लिए उन्हें ही कोसा जाता है। उन पर ही पाबंदियां लगाई जाती हैं। बावली ग्राम सुधार समिति ने भी इसी सोच के साथ बेटियों के टाइट पहनावे पर प्रतिबंध लगा दिया। पंचायत का मानना था कि इस तरह के कपड़ों से अंग प्रदर्शन होता है। इसी वजह से आजकल बेटियों के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। यह भी समाज की बुराई है जिसे दूर किया जाना चाहिए। लड़कियों को मोबाइल भी नहीं दिया जाना चाहिए। यह आम धारणा है।
Daughters of Baghpat are moving in every field and she is not accepting decisions of Khap Panchayats
रिया और रितिका - फोटो : अमर उजाला
कोई और क्यों तय करे हमारा पहनावा  
बावली की अधिकतर लड़कियां पढ़ने के लिए बड़ौत जाती हैं। गांव की विजिट के दौरान कुछ जींस पहनती हुई नजर आईं। बातचीत में सभी का यही कहना था, कोई और क्यों हमारा पहनावा तय करे। इस मुद्दे पर वे बेधड़क अपनी राय रखती हैं।
विज्ञापन

मोबाइल का दुरुपयोग हो रहा है

Daughters of Baghpat are moving in every field and she is not accepting decisions of Khap Panchayats
रूपा तोमर - फोटो : अमर उजाला
समिति के सदस्य महेंद्र सिंह कहते हैं, पंचायत में सामाजिक कुरीतियों को दूर करने का फैसला लिया गया था। उनमें कन्या भ्रूण हत्या, दहेज जैसी बुराई के प्रति सामाजिक जागरूकता लाना भी था। लड़कियों को टाइट कपड़े पहनने से भी मना किया गया। लड़कों को भी सड़कों पर जांघिया पहनकर न दौड़ने, नशे से दूर रहने को कहा गया था। पंचायत में बच्चों के अभिभावकों को बुलाकर समझाया गया था। जिन कपड़ों से अंग प्रदर्शन होता हो, उन्हें नहीं पहनना चाहिए। मोबाइल का भी दुरुपयोग हो रहा है।
विज्ञापन
अगली फोटो गैलरी देखें

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

Followed