सहारनपुर जिले में पत्रकार आशीष और उसके भाई की हत्या के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। क्योंकि, पिता की कैंसर से मौत के बाद आशीष ही परिवार में कमाने वाला था। दोनों पुत्रों की हत्या के बाद सुधबुध खो चुकी उनकी मां बेटों को याद कर बार-बार चिल्लाती रही और बेहोश होकर गिर गई। वहीं जवान भाइयों की मौत से पूरा मोहल्लेवासियों में भी शोक की लहर है। अगली स्लाइडों में जानिए इस दोहरे हत्याकांड को लेकर पूर्व सीएम अखिलेश यादव और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने क्या कुछ कहा-
पत्रकार हत्याकांड: परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, पिता की मौत के बाद आशीष था घर का सहारा
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पत्रकार की हत्या पर प्रियंका ने सरकार को घेरा
सहारनपुर में पत्रकार और उनके भाई की हत्या पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रदेश सरकार को घेरा है। उन्होंने ट्वीट करके कहा, अब आप इस व्यवस्था को क्या कहेंगे। जहां हर दिन गोली चलाकर सरेआम हत्याओं का दौर चल रहा है। अपराधों को रोकने की जिम्मेदारी वाले लोग लीपापोती में जुटे हैं और यूपी तो अपराधयुक्त है ही।
पत्रकार व उनके भाई की हत्या पर दुख जताया
अखिलेश यादव ने सहारनपुर में पत्रकार आशीष कुमार व उनके भाई आशुतोष की हत्या पर गहरा दुख जताते हुए दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। उन्होंने कहा कि समाजवादी सरकार में मृतक के परिजनों को 20-20 लाख रुपए की तत्काल आर्थिक सहायता दी जाती थी। भाजपा सरकार को कम से कम इतनी मदद तो करनी ही चाहिए।
पत्रकार हत्याकांड: दो भाइयों के मर्डर की असली वजह क्या? इन सवालों में छिपे कई गहरे राज
मोहल्ला पुराना माधवनगर निवासी 25 वर्षीय आशीष युवा पत्रकार थे। वह कई अखबारों में सेवाएं दे चुके थे। दो वर्ष पूर्व आशीष के पिता प्रवीन कुमार की कैंसर से मौत हो गई थी। इसके बाद ही आशीष परिवार में कमाने वाला था। उसका छोटा भाई आशुतोष पढ़ाई कर रहा था। हत्या के बाद से आशीष की मां उर्मिला सुध बुध खो चुकी है। वह बार-बार दोनों बेटों को चीख-चीखकर पुकार रही थी। वारदात में उर्मिला भी घायल हुई है, जब उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया तो वह इमरजेंसी में कहती रही कि मेरे आशीष और आशुतोष को बुलाओ, वह दोनों भी घायल है और मैं उनके साथ ही मरहम पट्टी कराऊंगी। उर्मिला के साथ आए मोहल्लावासी और रिश्तेदार उनसे कहते रहे कि थोड़ी देर में आशीष और आशुतोष आ जाएंगे। उनका दूसरे डॉक्टर के यहां इलाज हो रहा है। दोनों पुत्रों के नाम लेकर उर्मिला चिल्लाती रही और कई बार बेहोश होकर गिर गई।
आशीष के साथ रहने वाली उनकी 92 वर्षीय दादी लीला का भी रो-रोकर बुरा हाल हो गया है। मोहल्लेवासियों में भी शोक की लहर है। हर कोई आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दिए जाने की मांग कर रहा है।
पत्रकार हत्याकांड: लोग चाहते तो बच जाती दोनों भाइयों की जान, पूरे परिवार को खत्म करने की थी साजिश