कोरोना ने जिंदगी के नियम, कायदे और मायनों को बदल दिया है। यहां तक की अंतिम संस्कार की रस्म भी। रविंद्रपुरी निवासी सब्जी विक्रेता की पत्नी, भाइयों और परिवारीजनों से इस महामारी ने अंतिम विदाई का हक भी छीन लिया। चंद लोगों को छोड़कर किसी को भी शवदाह गृह में आने की अनुमति नहीं थी।
कोरोना का कहर: अंतिम विदाई का हक भी छीन रही ये महामारी, भावुक कर देंगी तस्वीरें
मेडिकल कॉलेज से एंबुलेंस में राजेश का शव सूरजकुंड स्थित शव दाह गृह पहुंचा। पुत्र और तीन रिश्तेदार वहां मौजूद थे। एंबुलेंस से उतारकर शव को पुरोहितों के आदेश पर पटरे पर रखा गया। चिता सजाई जा रही थी, तभी व्यापारी का 14 साल का किशोर पुत्र फफक-फफक कर रोने लगा। रिश्तेदारों ने संभाला और अंतिम संस्कार की क्रियाएं पूरी कराई।
बेटा बोला-पापा ने कहा था गले में दर्द है
राजेश के दो बेटियां और एक बेटा है। बेटा सबसे छोटा है। सूरजकुंड पर उसने बताया कि दो दिन पहले पापा ने बताया था कि गले में दर्द है। इसके बाद ही उन्हें मेडिकल कॉलेज ले जाया गया था।
फल और सब्जी का कारोबार
राकेश के पांच भाई सदर और नवीन मंडी में सब्जी का कारोबार करते हैं। एक भाई दिल्ली में परिवार के साथ रहता है। रिश्तेदारों के घर भी सदर में ही आसपास हैं। ज्यादातर लोग फल व सब्जी के कारोबार से जुड़े हैं।
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