दस जनवरी को चंद्रग्रहण को लेकर ज्योतिष जगत में मतभेद उभर आया है। सहारनपुर के ज्योतिषाचार्य साफ कहते हैं कि चंद्रग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, जब चंद्रग्रहण दिखेगा ही नहीं तो फिर राशियों पर असर या सूतक कैसे लग जाएगा। सहारनपुर के विद्वानों की विप्रों की सबसे बड़ी संस्था विप्र परिवार न न ने पारित तिथि-व्रतोत्सव पत्रिका में इन्हीं कारणों से इस चंद्र ग्रहण का कोई उल्लेख नहीं किया है।
चंद्रग्रहण का भारत में कैसा रहेगा असर, जानने के लिए पांच क्लिक में पढ़िए
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उपग्रहण का ये होगा समय
उपग्रहण का समय भारतवर्ष में 10 जनवरी की रात्रि 10:38 मिनट पर प्रारंभ होगा एवं मोक्ष काल 11 जनवरी की देर रात्रि 2:42 पर होगा अर्थात इस चंद्र उपग्रहण की कुल अवधि 4 घंटे से कुछ ज्यादा रहेगी। उपछाया ग्रहण के लिए किसी भी प्रकार के सूतक, स्नान, दान आदि के महत्व का विचार भी नहीं होगा। सहारनपुर के विद्वान विप्रों की सबसे बड़ी संस्था विप्र परिवार (सनातन संरक्षण संघ) की ओर से पारित तिथि, व्रतोत्सव पत्रिका में भी इस चंद्र ग्रहण का कोई उल्लेख नहीं है। - महंत राघवेंद्र स्वामी श्री राम पंचायतन सिद्ध पीठ, मानस निकेतन, पंत विहार, सहारनपुर
चंद्रग्रहण नहीं उपछाया है
ये चन्द्रग्रहण नहीं बल्कि चंद्रमा की उपछाया है। ज्योतिष ग्रंथों में इसे चंद्र मालिन्य भी कहते हैं। ये चंद्रग्रहण से पूर्व की स्थिति होती है क्योंकि चंद्रग्रहण ग्रस्त नहीं होगा। ये जो कुछ ज्योतिष इंटरनेट पर बता रहे हैं, वह लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। - आचार्य रोहित वशिष्ठ, ज्योतिषचार्य और अधिष्ठाता श्री बगुलामुखी शिव मंदिर ब्रह्मपुरी कॉलोनी
पंचांग में नहीं है चंद्रग्रहण का जिक्र
पंचांग में इस चंद्रग्रहण का कहीं कोई जिक्र नहीं है। हम भी इंटरनेट आदि के माध्यमों से तमाम बातें सुन और देख रहे हैं। जो उचित नहीं है। कई लोगों के इस बाबत फोन आ रहे हैं। जिन्हें बताया जा रहा है कि दस जनवरी को कोई चंद्रग्रहण नहीं होगा तो फिर कोई सूतक भी नहीं लगेगा। - पंडित अभिषेक कृष्णात्रेय, ज्योतिषाचार्य व अधिष्ठाता तहसील शिव मंदिर
राशियों पर नहीं पड़ेगा प्रभाव
जब चंद्रग्रहण है ही नहीं तो कैसे राशि पर असर पड़ेगा। ज्योतिषियों को अपनी परंपरा के अनुसार सारी जानकारी के बाद ही कुछ कहना चाहिए। उपछाया इसलिए इसे कहा जा रहा है कि प्रत्येक चंद्रग्रहण घटित होने से पहले चंद्रमा पृथ्वी की उपछाया में अवश्य प्रवेश करता है, जिसे चन्द्र मालिन्य कहा जाता है न कि चंद्रग्रहण। - जितेन्द्र शांडिल्य, ज्योतिषाचार्य पुराना शुगर मिल क्षेत्र
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/