जमीन पर पैर रखकर भी आसमानों में परवाज की जा सकती है। ऊंचाइयां छूने के लिए जमीनी होना बेहद जरूरी है। शहर की बेटी करिश्मा यूं ही सीबीएसई इंटर की ऑल इंडिया टॉपर नहीं बनी। वह बताती हैं कि करिश्मा अरोरा को ‘करिश्मा’ बनाने वाले उसके माता-पिता हैं। वह भी एक सामान्य लड़की है, लेकिन सोच उसे अन्य से अलग करती है। आइए अगली स्लाइडों में जानते हैं कि क्या है करिश्मा अरोरा का प्लान:-
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ऑल इंडिया टॉपर करिश्मा अरोरा
- फोटो : अमर उजाला
डॉक्टर, इंजीनियर बनने की होड़ के इतर उसे नृत्य का शौक है और वह दिव्यांग लड़कियों को कत्थक सिखाना चाहती हैं। वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों के जीवन में खुशी के पल देना चाहती है।
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अपने शिक्षकों के साथ करिश्मा अरोरा
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सीबीएसई इंटर में 500 में से 499 अंक हासिल कर सेलिब्रेटी बनी करिश्मा अरोरा शुक्रवार शाम करीब साढ़े तीन बजे जानसठ रोड स्थित तिरुपति होम आवास पर सहेलियों के साथ घूमने जाने को उतावली थीं। इसी दौरान उन्होंने अमर उजाला से बातचीत की।
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करिश्मा अरोरा डांस थैरेपिस्ट बनना चाहती हैं
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सवालों का जवाब देते हुए करिश्मा ने बताया कि वह बचपन से ही सेंसेटिव हैं। मानव व्यवहार को समझती है, इसलिए डॉक्टर, इंजीनियर के बजाए साइकोलॉजी चुना। साइकोलॉजी में करियर बनाना चाहती हैं। डांस का बचपन से ही शौक है और इसे माता-पिता के सहयोग ने परवान चढ़ाया। हर सप्ताह पिता मनोज कुमार अरोरा उसे प्रसिद्ध कत्थक नृत्यांगना गीतांजलि लाल से नृत्य सिखाने दिल्ली खेल गांव लेकर जाते हैं।
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मां मोनिका अरोरा के साथ करिश्मा अरोरा
- फोटो : अमर उजाला
वह दिव्यांग बच्चों को कत्थक सिखाना चाहती हैं। इसके लिए विशेष प्रशिक्षण भी ले रही हैं। कहती हैं कि यह समाज का वह तबका है जिस पर कोई ध्यान नहीं देता। साइकोलॉजिस्ट बनकर वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों की सेवा कर उनके जीवन में खुशी लानी है। असाधारण उपलब्धि हासिल करने वाली करिश्मा की पसंद भी अलग हैं।