चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग पर शनिवार को सुबह के समय फिर से एक कार नहर में समा गई और पांच जिंदगियां एक ही झटके में खत्म हो गईं। पुलिस नहर में डूबे लोगों की तलाश कर ही रही थी कि मात्र चौबीस घंटे बाद ही फिर से एक कार इस नहर में जा गिरी। काफी तलाश के बाद भी कार का कोई सुराग नहीं लग सका। अब तक यह नहर न जानें कितने ही लोगों की मौत का कारण बन चुकी है। आगे तस्वीरों में देखें क्यों खूनी नहर बन चुकी है गंगनहर:-
गौरतलब है कि पिछले दो माह के भीतर ये तीसरा बड़ा हादसा है। इससे पहले पिछले दिनों गुरुवार को कांवड़ मार्ग पर पूठ गंगनहर के पुल के पास नोएडा की एचसीएल में काम करने वाले इंजीनियर की स्विफ्ट डेजायर कार अनियंत्रित होकर गंगनहर में जा गिरी थी। किसी तरह गुरनीक कौर व विशाल तो तैर कर बाहर आ गये, लेकिन कार चला रहा इंजीनियर नितिन गुप्ता कार के साथ ही पानी में समा गया। कई दिन बाद नहर से उसका शव बरामद किया जा सका।
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गंगनहर में कार की तलाश करती टीम
शनिवार को भी मेरठ से सटे सरधना क्षेत्र के सलावा में नहर पटरी से होकर हरिद्वारा जा रहे परिवार की सारी खुशियां एक ही पल में उजड़ गईं। इर्टिगा कार में ड्राइवर सहित ग्यारह लोग सवार थे। हादसे में ड्राइवर सहित पांच लोगों की मौत हो गई। थाना प्रभारी धनवीर सिंह ने बताया कि कार का पहिया पंचर होने से यह हादसा हुआ है। पुलिस के अनुसार यह परिवार गुरुग्राम से हरिद्वार गंगा स्नान करने के लिए जा रहा था।
सलावा गांव में रहने वाले हुकुम सिंह के परिवार पर गम का पहाड़ टूट पड़ा। वह अपने परिवार के साथ अपने एक रिश्तेदार के घर तेहरवीं के आयोजन में शामिल होने जा रहे थे कि अचानक गंगनहर पटरी पर चलते हुए कार का नियंत्रण खो गया और कार नहर में जा गिरी। इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई थी जबकि एक बच्ची व महिला को सुरक्षित बचा लिया गया।
मेरठ में चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग (गंगनहर पटरी) पर रात के लिए न तो कोई लाइट की व्यवस्था है और नही कहीं स्पीड ब्रेकर। पुलिस ने कहीं भी बैरियर नहीं लगाए हैं। रात में वाहनों की स्पीड के लिए भी संकेत के लिए बोर्ड भी नहीं लगाए गये हैं। ऐसे में लगातार हादसे हो रहे हैं और सरकारी सिस्टम चुप्पी साधे बैठा है। मेरठ में गंगनहर पटरी मार्ग की लंबाई 42 किमी है। एक साल में बीस से अधिक लोगों की जान गंगनहर में गिरकर जा चुकी है।