13 का संयोग अटल बिहारी वाजपेयी के साथ मेरठ से ही शुरू हुआ था। यहां उन्होंने एक ही दिन में 13 सभाएं की। सभी में भीड़ देखकर न केवल गद्गद् हुए बल्कि बोले कि इन 13 सभाओं को मैं भूलने वाला नहीं।
दुर्लभ तस्वीरें: अटल जी ने 1 दिन में की थी 13 सभाएं, भीड़ देख बोले-जिंदगी में नहीं भूलूंगा यह प्यार
वाकया सन 1985 का है जब एक ही दिन में अटल बिहारी वाजपेयी ने 13 सभाएं की। उस समय प्रदेश अध्यक्ष कल्याण सिंह थे। मोहनलाल कपूर जिलाध्यक्ष और प्रोग्राम कभनवीनर ब्रजगोपाल गुप्ता था। ब्रजगोपाल बताते हैं कि 13 सभाओं के आयोजन की बात सुनकर एक बार तो अटल जी की पेशानी पर बल पड़ गए। कहा कि एक दिन में 13 सभा। इससे अच्छा तो मुझे पैदल ही शहर में घुमा देते। खैर कार्यकर्ताओं ने मनाया तो वे बोले शर्त यह है कि मैं शाम सात बजे वहां से निकल जाऊंगा। कार्यक्रम समय पर रखना। सभा छूटे या रहे यह आपकी जिम्मेदारी।
उनकी पहली सभा सिसौली में हुई। दूसरी माछरा, तीसरी किठौर, परीक्षितगढ़, मवाना, लावड़, दौराला, सरधना, बिनौली, बड़ौत, बागपत और सबसे आखिर में खेकड़ा। इससे पहले जिमखाना में बैठक हो चुकी थी। चूंकि उस समय यह पूरा जिला एक ही था। खेकड़ा की सभा में वह पहुंचे तो साढ़े साज बज गए पर कार्यकर्ताओं का प्यार देखकर न केवल सभा बल्कि दस बजे तक रुके रहे।
खीर बनवाकर खाई
खेकड़ा में उन्होंने कहा कि अब भोजन यही होगा। इन सभी सभाओं में कार्यकर्ताओं ने उन्हें पार्टी चंदे के रूप में सिक्कों की थैलियां भेंट की थी। सभी जगह से लगभी दो लाख रुपया दिया गया था। खैर, उन्होंने खेकड़ा में भोजन किया और अपनी मनपसंद खीर कहकर बनवाई।
अजय मित्तल से कराया था अनुवाद
सन 1975 की बात है। अटल बिहारी की मेरठ में पूरी जनसंघ की टीम थी। वह खंदक बाजार में चंपालाल जैन के यहां आए हुए थे। साथ ही लाकृष्ण आडवाणी, विजय मलहोत्रा आदि सभी जनसंघ के नेता थी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचार प्रमुख अजय मित्तल वाकया याद करते हैं। बताते हैं कि वह दो दिन यहां रुके। अजय दसवीं के छात्र थे। उन्हें चंपालाल जैन ने बुलाया। अटल जी के हाथ में दो कागज। एक हिंदी और एक अंग्रेजी में लिखा हुआ। उन्होंने इसका अनुवाद करने के लिए अजय मित्तल को दिया। अजय ने दस मिनट में ही इसका अनुवाद कर दे दिया। उन्होंने इसे खुद पढ़ा और आडवाणी को भी पढ़वाया। वह खुश हुए और अजय मित्तल की पीठ थपथपाई।