हिम्मत हारने वालों को कुछ नहीं मिलता जिंदगी में, मुश्किलों से लड़ने वालों के पैरों में जहां होता है... कुछ ऐसी ही कहानी है मेडिकल कॉलेज के पास भोपाल विहार में रहने वाली अंतरराष्ट्रीय कुश्ती खिलाड़ी कविता गोस्वामी की। मात्र 26 साल की उम्र में जिंदगी ने उन्हें इतने दर्द दे दिए कि कोई भी आम आदमी टूटकर बिखर जाता। लेकिन कविता ने कभी हार नहीं मानी। लगातार हालात से संघर्ष किया। खेल के बलबूते पुलिस में नौकरी पाई और फिर से अपनी जिंदगी को एक मुकाम पर पहुंचाया।
अपराजिता: पति से मिला धोखा, हादसे में टूटी हड्डियां मगर नहीं छूटा हौसला, फिर लिखी जीत की कहानी
कविता गोस्वामी मात्र छह साल की थी, जब पिता सुभाष पुरी हरियाणा छोड़कर मेरठ में बस गये। करीब दस साल की उम्र में ही कविता में कुश्ती की प्रतिभा दिखने लगी। राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कविता ने शानदार खेल दिखाया। 2006 से 2010 तक लगातार नेशनल खेलों में स्वर्ण पदक हासिल किया। एशियन चैंपियनशिप में ब्रांज मेडल जीता।
कविता का शानदार सफर जारी था, लेकिन एक घुटने की चोट ने कविता के खेल पर ब्रेक लगा दिया। पांच साल पहले घुटने की चोट के कारण कविता घर पर रहीं। इस पर परिवार के लोगों ने उनकी शादी का फैसला कर लिया। महज 21 साल की उम्र में मेरठ में ही कविता की शादी कर दी गई। शादी के बाद कुश्ती से तो नाता ही टूट गया। बल्कि नए संघर्ष की शुरुआत हो गई।
कविता का पति जयपुर में नौकरी करता था। वह छह से सात महीने तक घर नहीं आता था। इस पर ससुरालियों ने जबरन कविता को पति के साथ जयपुर भेज दिया जबकि पति कविता को जयपुर ले जाना नहीं चाहता था।
आठ माह का गर्भ, पति ने छोड़ा साथ
जयपुर जाने के दौरान कविता के पेट में सात माह का गर्भ था। वहां पहुंचने के बाद पति ने उसे अंजान सी जगह पर अकेला रखा। गर्भवती होने के बावजूद पति ने उसके खाने-पीने और इलाज पर कोई ध्यान नहीं दिया।
करीब एक माह बाद पड़ोस की महिलाओं ने कविता को सहारा दिया। इसी दौरान कविता को पति की दूसरी शादी के बारे में पता चला तो उसके पैरों तले जमीन निकल गई। आठ माह के गर्भ के साथ कविता जयपुर से अकेली दिल्ली पहुंची। वहां से पिता सुभाष पुरी उसे मेरठ ले आए।
कुछ दिनों बाद कविता ने बेटे को जन्म दिया और पति से तलाक ले लिया। जिंदगी में मिले इस दर्द से टूट चुकी कविता को परिवार के लोगों ने दोबारा शादी करने के लिए कहा, लेकिन उसने इंकार कर दिया।
इतना सब होने के कुछ दिनों बाद एक सड़क हादसे में कविता को गंभीर चोटें आईं। उसके हाथ और पैर की हड्डी टूट गई। लेकिन माता सरला देवी, पिता सुभाषपुरी, कोच जबर सिंह सोम, कुश्ती खिलाड़ी अलका तोमर ने कविता का हौसला नहीं टूटने दिया।