फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

एक्सक्लूसिव: महिलाओं ने हुनर से पकड़ी कामयाबी की रफ्तार, हाथों से गूंथती हैं कान्हा के झूले और झूमर, तस्वीरें

Wed, 11 Nov 2020 05:20 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली Published by: कपिल kapil Updated Wed, 11 Nov 2020 05:20 PM IST
विज्ञापन
Amar Ujala Exclusive Report: women join groups to make decorative items in Shamli
दीपावली मेले में सरस्वती समूह के स्टाॅल पर मौजूद महिला। संवाद - फोटो : अमर उजाला

चूल्हे-चौके में व्यस्त रहने वाली ग्रामीण महिलाओं ने हाथों के हुनर से कामयाबी की राह पकड़ी है। घरों में रहकर ही उन्होंने अपनी कारीगरी के दम पर अच्छी कमाई शुरू कर दी है। महिलाएं समूह से जुड़कर घरों का सजावटी सामान बनाती हैं। गुड़िया, देवी-देवताओं की मूर्ति के लिए कपड़े, सजावटी नारियल, टेडीवियर, बैग और अन्य कई तरह के सामान तैयार करती हैं। जिला मुख्यालय में चल रहे दिवाली मेले में 60 समूहों ने अपने उत्पादों के स्टाल लगाए हैं।

हाथों से गूंथती हैं कान्हा के झूले और झूमर

Amar Ujala Exclusive Report: women join groups to make decorative items in Shamli
दीपावली मेले में सरस्वती समूह के स्टाॅल पर मौजूद महिलाएं। संवाद - फोटो : अमर उजाला

शामली के गांव खोडसमा निवासी शाइस्ता और समूह सखी कविता तीन साल पहले समूह से जुड़ी। 15 हजार रुपये लेकर काम की शुरुआत की। कविता बताती हैं कि उन्होंने कहीं ट्रेंनिंग नहीं लीं। घर की महिलाओं के साथ बैठकर ही धागे एवं डोरियों से गणेश जी, सजावटी आइना, लटकन, कान्हा जी के झूले, झूमर, पॉट, तितल, कुशन आदि बनाना सीखा। दिवाली पर उन्हें लगभग 20 हजार रुपये की बचत हो जाती है। उनके साथ दो और महिलाएं इसी तरह के उत्पाद अपने हाथों से तैयार करती हैं। उनके बनाए उत्पाद 200 से 600 रुपये तक के हैं।

Amar Ujala Exclusive Report: women join groups to make decorative items in Shamli
सामान खरीदती महिलाएं - फोटो : अमर उजाला

मांग के अनुरूप नहीं हो पाता उत्पादन 
गांव हिंगोखेड़ी की अनीता बैग बनाती हैं। वह भी लगभग तीन साल से तुलसी स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। पहले उनके पास एक ही मशीन थी। समूह से 20 हजार रुपये का ऋण लेकर दो और मशीनें लीं। समूह सचिव रेखा व एक अन्य महिला मिलकर बैग तैयार करती हैं। हैंगिंग बैग के साथ ही स्कूल बैग भी बनाती हैं। वह बताती हैं कि गांव से ही उन्हें इतने ऑर्डर मिल जाते हैं कि उनकी भी पूर्ति नहीं कर पाती। प्रतिमाह पांच से छह हजार रुपये कमा लेती हैं। बैग की सिलाई उन्होंने घर पर ही सीखी और अपने इसी हुनर के दम पर कमाई भी कर रही हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Amar Ujala Exclusive Report: women join groups to make decorative items in Shamli
दीपावली मेले में सरस्वती समूह के स्टाॅल पर मौजूद महिला। संवाद - फोटो : अमर उजाला

शौक को बनाया कमाई का जरिया
गांव बुच्चाखेड़ी में सरस्वती स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष संगीता हाईस्कूल तक पढ़ी हैं। उन्हें बचपन से ही कढ़ाई-बुनाई और हैंडीक्राफ्ट का शौक था। तीन साल पहले वह समूह से जुड़ी और अब सजावटी नारियल, बंदनवार, शीशे में लगी प्रतिमाएं, पूजा की थाली, गुड़िया, टेडीवियर, आइसक्रीम स्टिक से सजावटी सामान बनाने शुरू किए। 

विज्ञापन
Amar Ujala Exclusive Report: women join groups to make decorative items in Shamli
दीपावली मेले में सरस्वती समूह के स्टाॅल पर मौजूद महिला। संवाद - फोटो : अमर उजाला

कहती हैं कि शादी और त्योहारी सीजन में उनके बनाए सामान की काफी मांग रहती है। पति नीरज पानीपत में प्राइवेट नौकरी करते हैं। तीन साल पहले संगीता ने काम शुरू किया। अब घर पर काम करके ही तीन-चार हजार रुपये महीने कमा लेती हैं। मेले में उनका स्टॉल आकर्षण का केंद्र है।

नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें


https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed