जिसने ठुकराया उसी समाज के लिए प्रेरणा बने ये किन्नर, कोई खुद ग्रेजुएट तो कोई जगा रहा शिक्षा की अलख
इनमें कोई ऐसा भी है जो सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर एचआईवी पीड़ितों की सेवा कर रहा है तो कुछ अनाथ बच्चों के पालन के साथ शिक्षित कर रहे हैं। यहां कंकरखेड़ा में आयोजित अखिल भारतीय किन्नर सम्मेलन के दौरान किन्नरों का यह रूप भी सामने आया है। आगे जानें ऐसी ही कुछ कहानियां जो समाज को किसी ने किसी रूप में प्रेरित करती हैं: -
कूड़े के ढेर में मिले बच्चे को संभाला
एक बच्चा जिसे समाज ने गंदगी समझकर कूड़े के ढेर में फेंक दिया था। उसे देखकर किन्नर बॉबी में मातृत्व की भावना जागृत हो गई। बच्चे का लालन-पालन कर बॉबी ने उसे बड़ा किया। पिता के रूप में सभी जिम्मेदारियों का निर्वाह करते हुए नामकरण के बाद विवाह आदि सभी संस्कार पूर्ण कराए। नोएडा निवासी किन्नर बॉबी ने यह उदाहरण समाज के सामने प्रस्तुत किया।
बॉबी ने बताया नोएडा क्षेत्र में एक नाले के पास कूड़े के ढेर से उसे एक बच्चे के रोने की आवाज आई। मौके पर जाकर देखा तो वह बच्चा मात्र तीन दिन का था। बॉबी उसे घर ले आया और शिक्षा-दीक्षा दिलाई। आज बच्चा गुजरात स्थित एक शिपिंग कंपनी में कार्यरत है। बॉबी ने बताया कि हाल ही में उसका गुजरात में विवाह कराया है। एक अनाथ बच्ची की भी उसने पढ़ाई लिखाई की जिम्मेदारी उठाई। पिता बनकर उसका कन्यादान भी किया।
एचआईवी के प्रति कर रहीं जागरूक
एड्स रोगियों और एचआईवी पीड़ितों से समाज दूरी बनाकर रखता है। एचआईवी पीड़ितों को भी अलग जगह रखा जाता है। लेकिन किन्नर समाज ऐसे लोगों की सेवा में आगे आकर कार्य कर रहा है। परिवर्तन ट्रस्ट के साथ कार्य कर रही पहाड़गंज दिल्ली निवासी रिंकी ने बताया कि वह बीएड कर रही है। वह अपनी टीम के साथ एचआईवी पीड़ितों की सेवा कर रही है।