मेरठ के कंकरखेड़ा में आयोजित किन्नर महासम्मेलन का चटाई पूजन और बड़े खाने के साथ सोमवार शाम को समापन हो गया। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन हुआ। बॉलीवुड और लोकगीतों पर किन्नर जमकर थिरके।
किन्नर महासम्मेलन का चटाई पूजन और बड़े खाने के साथ हुआ समापन, कई अनजाने रहस्यों से उठा पर्दा
सम्मेलन में कोकिला दिल्ली, बिदामी दिल्ली, शकुंतला चावला मलियाना मेरठ, आपा अलीगढ़, राजकुमारी हापुड़, रवीना दिल्ली सहित उनकी टोली को विमला किन्नर दौराला-कंकरखेड़ा ने भेंट स्वरूप तांबे की परात, प्लेट और लड्डू दक्षिणा में दी।
सम्मेलन के समापन समारोह के दौरान किन्नरों ने जमकर नाचगाना किया और धार्मिक अनुष्ठानों को पूरा किया।
आयोजक किन्नर विमला ने बताया कि इस दौरान कलश यात्रा, चाक पूजन, घट स्थापना, शिव मंदिर में विशेष पूजा की गई। मायरा रस्म, चटाई रस्म, कलश रस्म के साथ किन्नरों को इनाम देकर विदा किया गया।
राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड और प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किन्नरों ने शहर के लोगों को सुख शांति का आशीर्वाद दिया। सैनिकों के लिए विशेष प्रार्थना की।
कल्पित कथाओं के खुले रहस्य
सम्मेलन में किन्नरों ने बहुत सी कल्पित कथाओं के रहस्यों का खुलासा किया। समाजसेवी किन्नर रिंकी और किन्नर मोहिनी ही कहा कि थर्ड जेंडर को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। जिसमें मृत्यु उपरांत शवों को रात में जलाना, जन्म के तुरंत किन्नर बच्चे को किन्नरों द्वारा जबरन ले जाना आदि हैं। उन्होंने ज्यादातर बातों को समाज द्वारा बुनी हुई कहानी बताया।
लोगों का मानना है कि मृत्यु के बाद किन्नर के शव को जूतों से पीटते हुए खड़ाकर ले जाते हैं। किन्नर रिंकी ने बताया कि ऐसा नहीं है। किन्नर जहां रहता है, उसके आसपास के लोग भी शवयात्रा में शामिल होते हैं। किन्नर जिस धर्म को मानता है, उसी पद्धति से उसका अंतिम संस्कार होता है।