आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर हुए सड़क हादसे में जिन तीन युवकों की जान गई हैं, उनमें ईओ लावड़ सुधीर सिंह भी शामिल थे। बताया गया कि सुधीर सिंह ने कड़ी मेहनत से अफसर की जॉब पाई थी और इसी साल उन्होंने PCS की परीक्षा भी पास की थी। वहीं हादसे में पल भर ही उनकी दुनिया उजड़ गई।
तीन की मौत: सुधीर ने कड़ी मेहनत से पाई थी अफसर की जॉब, पलभर में उजड़ गई दुनिया, दर्दनाक हैं हादसे की तस्वीरें
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वहीं अधिशासी अधिकारी की मौत की सूचना से नगर पंचायत में मातम पसर गया। साथी कर्मचारियों ने बताया कि मूलरूप से लखनऊ निवासी ईओ सुधीर सिंह ने कोचिंग पढ़ाने के दौरान ही उनका चयन अधिशासी अधिकारी पद के लिए हुआ। ट्रेनिंग के बाद लावड़ नगर पंचायत में पहली तैनाती मिली। वह मेरठ में आईजी कार्यालय के पास सरकारी क्वार्टर में रहते थे। उनके भाई डॉ. सुधाकर सिंह लखनऊ में चिकित्सक हैं। उनके साथ कार में मवाना खुर्द निवासी असलम व भगवानपुर चट्टावन निवासी तनुज तोमर भी थे।
मेधावी छात्र रहे थे ईओ
सुधीर सिंह पढ़ाई में बहुत तेज थे। उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में अधिशासी अधिकारी की नौकरी प्राप्त कर ली थी। लावड़ में तैनाती के दौरान वह पीसीएस की तैयारी करते रहे। पीसीएस परीक्षा भी उन्होंने पहले ही प्रयास में पास कर ली थी।
कई नगर पंचायत का संभाला कार्यभार
ईओ के पास फलावदा व बहसूमा नगर पंचायत की भी जिम्मेदारी रही। हाल ही में उन्हें सिवालखास व हर्रा का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था। लिपिक असलम के पास भी लावड़, हर्रा व खिवाई नगर पंचायत का अतिरिक्त कार्यभार था। तनुज तोमर सरकार के स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत जिला कोर्डिनेटर (डीसी) का कार्य देख रहे थे।
दुर्घटना का शिकार हुए लिपिक असलम गांव मवाना खुर्द के रहने वाले थे। असलम चार भाइयों में दूसरे नबंर के थे। बड़े भाई असरफ बाहर नौकरी करते हैं, जबकि असलम से छोटा असरफ गांव में बैटरी की दुकान चलाते हैं। सबसे छोटा भाई अरशद नगर पंचायत हर्रा में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। असलम के दो पुत्र अर्स (14) व उजैस (13) मेरठ में आरके इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ते हैं। तीसरा पुत्र आदिल तीन वर्ष का है।