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ब्लॉक प्रमुख हत्याकांड: कभी अजीत और कुंटू थे जिगरी दोस्त, बाद में बढ़ गईं दूरियां

Thu, 07 Jan 2021 01:13 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, मऊ
अमर उजाला नेटवर्क, मऊ Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Thu, 07 Jan 2021 01:13 PM IST
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Block pramukh murder case: Once Ajit singh and Kuntu were close friends distance increased later
पूर्व ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह - फोटो : अमर उजाला

अजीत सिंह और कुंटू सिंह कभी जिगरी दोस्त हुआ करते थे लेकिन संपत्ति के बंटवारे में दोनों के बीच मतभेद हो गए। धीरे-धीरे यह मतभेद जानी दुश्मनी तक जा पहुंचा। आजमगढ़ जिले के सगड़ी के तत्कालीन विधायक सर्वेश सिंह सीपू की हत्या की साजिश रचे जाने की मुखबिरी इसी अजीत सिंह ने की थी, जिसकी वजह से प्रशासन ने सीपू सिंह को सुरक्षा प्रदान की थी। हालांकि बाद में सीपू सिंह की हत्या कर दी गई, जिसमें कुंटू सिंह का नाम आया था।

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अजीत सिंह। - फोटो : अमर उजाला

ब्लॉक प्रमुख पद पर कब्जा करने की कुंटू सिंह की लालसा अजीत सिंह की वजह से धरी की धरी रह गई। उधर संपत्ति के बंटवारे को लेकर अजीत और कुंटू के बीच दूरियां बढ़ती गईं। कभी जिगरी दोस्त रहे कुंटू और अजीत एक दूसरे के दुश्मन बन गए। बाद में कुंटू अजीत को अपने वर्चस्व की बादशाहत में रोड़ा मानने लगा। इसे अजीत भी समझता था और कुंटू से सावधान रहता था।

Block pramukh murder case: Once Ajit singh and Kuntu were close friends distance increased later
मर्डर - फोटो : amar ujala

2005 के पहले कुंटू सिंह ने विधायक सीपू सिंह की हत्या की साजिश रची थी, जिसका पता अजीत सिंह को चल गया था। उन्होंने इसकी जानकारी पुलिस को दे दी। जिसके बाद आजमगढ़ के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक नवीन अरोड़ा ने विधायक की सुरक्षा बढ़ा दी थी, हालांकि बाद में उनकी हत्या कर दी गई थी। विधायक हत्याकांड में अजीत सिंह गवाह भी थे।

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हादसे का बाद के दृश्य। - फोटो : amar ujala

बसपा विधायक हत्याकांड
आजमगढ़ जिले के जीयनपुर चौक पर बाइक सवार बदमाशों द्वारा 19 जुलाई 2013 को बसपा के पूर्व विधायक सर्वेश सिंह सीपू की गोली मारकर हत्या कर दी थी। पूर्व विधायक हत्याकांड की तत्कालीन प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। हत्याकांड में प्रदेश की टॉप टेन सूची में शामिल कुख्यात अपराधी ध्रुव कुमार सिंह उर्फ कुंटू समेत उसके कई सहयोगी आरोपी हैं।

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घटनास्थल पर जांंच करते पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर। - फोटो : amar ujala

सात साल पहले हुए इस हत्याकांड में दर्ज मुकदमे में कुछ हिस्से की विवेचना जहां जिले की पुलिस कर रही है तो कुछ की सीबीआई। अब तक मात्र एक गवाह सर्वेश सिंह सीपू के भाई संतोष सिंह टीपू की ही गवाही हो सकी है, जिसकी 85 पन्नों की जिरह भी हो चुकी है। अजीत सिंह इस मामले का दूसरा सबसे मजबूत गवाह था। गवाही में इतनी लंभी जिरह और अब अजीत सिंह की हत्या कई सवाल खड़े कर रही है।

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