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राधाष्टमी 2026: सफेद छतरी में विराजीं ब्रजनंदनी, दर्शन को उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब; देखें भक्ति की तस्वीरें

Sat, 19 Sep 2026 09:38 PM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: Arun Parashar Updated Sat, 19 Sep 2026 09:38 PM IST
सार

डोला सफेद छतरी में पहुंचा तो राधाकृष्ण के श्रीविग्रह को विधि-विधान से विराजमान कराया गया। ब्रजनंदनी के नजदीक से दर्शन पाकर भक्तों की आंखों में श्रद्धा छलक उठी। चारों ओर राधे-राधे का मधुर जयघोष गूंज उठा।

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Radharani was seated under white canopy at Ladliji Temple in Barsana on ocassion of radhashtami
राधारानी का डोला लेकर जाता गोस्वामी समाज। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
राधाष्टमी की संध्या पर बरसाना में भक्ति अपने चरम पर पहुंच गई। लाडलीजी मंदिर के गर्भगृह से जैसे ही ब्रजनंदनी का डोला मंदिर प्रांगण में स्थित संगमरमर की सफेद छतरी की ओर बढ़ा, चारों ओर राधे-राधे का मधुर जयघोष गूंज उठा। फूलों से सजे डोले में विराजमान श्रीजी की एक झलक पाने को श्रद्धालुओं की आंखें छतरी की ओर टिकी रहीं। सफेद छतरी में राधारानी के विराजमान होते ही मानो मंदिर प्रांगण में भक्ति की गंगा बह उठी।


https://www.amarujala.com/photo-gallery/uttar-pradesh/mathura/radharani-was-seated-under-white-canopy-at-ladliji-temple-in-barsana-on-ocassion-of-radhashtami-2026-09-19
 
Radharani was seated under white canopy at Ladliji Temple in Barsana on ocassion of radhashtami
राधारानी के दर्शन को उमड़ी भीड़। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गोस्वामी समाज के युवक डोले को कंधों पर उठाकर जयकारे लगाते हुए सफेद छतरी तक पहुंचे। साथ चल रहे बुजुर्ग गोस्वामियों के मुख से वैदिक मंत्रोच्चारण और गाजे-बाजे की ध्वनि वातावरण को आध्यात्मिक बना रही थी। डोला सफेद छतरी में पहुंचा तो राधाकृष्ण के श्रीविग्रह को विधि-विधान से विराजमान कराया गया। ब्रजनंदनी के नजदीक से दर्शन पाकर भक्तों की आंखों में श्रद्धा छलक उठी। कोई हाथ जोड़कर अपलक श्रीजी को निहारता रहा तो कोई राधारानी की छवि को हृदय में बसाने की कोशिश करता रहा।

 
Radharani was seated under white canopy at Ladliji Temple in Barsana on ocassion of radhashtami
लाडलीजी मंदिर में भक्तों की भीड़। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीजी के सफेद छतरी में विराजमान होते ही गोस्वामी समाज की ओर से ब्रज के पारंपरिक पदों का समाज गायन शुरू हुआ। पदों की रसधार में मंदिर प्रांगण का कण-कण राधामय हो उठा। राधारानी को पुआ का भोग अर्पित किया गया। प्रसाद पाकर श्रद्धालु इसे श्रीजी की कृपा मानकर धन्य होते रहे।

 
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Radharani was seated under white canopy at Ladliji Temple in Barsana on ocassion of radhashtami
लाडलीजी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
संध्या ढलने के साथ ही सफेद छतरी पर भक्ति का रंग और गहरा होता गया। देर शाम गोस्वामी समाज की कुंवारी कन्या ने राधारानी का आरता किया। आरता के दीपों की लौ के साथ उठते राधे-राधे के जयकारों ने पूरे मंदिर प्रांगण को भावविभोर कर दिया। श्रद्धालु हाथ जोड़े श्रीजी के सामने खड़े रहे और आरता की उस मंगल बेला को अपनी आंखों में संजोते रहे।

 
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Radharani was seated under white canopy at Ladliji Temple in Barsana on ocassion of radhashtami
राधाष्टमी पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आरता के बाद राधाकृष्ण के श्रीविग्रह को पुन: डोले में विराजमान कर गर्भगृह में ले जाया गया। सफेद छतरी से लौटे श्रीजी के साथ दर्शन की वह दिव्य बेला तो संपन्न हो गई, लेकिन भक्तों के हृदय में राधारानी की वह छवि देर तक बसी रही और मंदिर प्रांगण राधे-राधे के जयघोष से गुंजायमान होता रहा।
 
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