यातायात नियमों की अनदेखी और एक ही बाइक पर चार लोगों के सवार होकर यात्रा करने से एक घर में मातम छा गया। एक घर से चार-चार अर्थियां उठने से पल भर में परिवार समेत गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया। उधर, पुलिस ने बस चालक को हिरासत में तो ले लिया, लेकिन उसका नाम बताने से कतराती रही है। हादसे के बाद से लोगों में काफी गुस्सा है।
Lakhimpur Kheri Accident: नियमों की अनदेखी पड़ी भारी, एक घर से उठीं चार अर्थियां, पुलिस की मौजूदगी में हुआ अंतिम संस्कार
मृतक सरवन के बड़े भाई रमाकांत ने बताया कि वह दो भाई थे। सरवन छोटा था। दोनों भाई मिलकर खेती-किसानी कर जीविका चलाते थे। हादसे की खबर उन्हें सुबह करीब साढ़े आठ बजे मिली तो परिवार में चीख पुकार मच गई। घर पर मौजूद ज्योति पति सरवन और पुत्री लकी की मौत की खबर सुनकर गश खाकर गिर पड़ी। उधर, चीख पुकार सुनकर आसपास के लोग घर पर आ गए। घटना के बारे में सुनकर सभी अवाक रह गए। गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया। आसपास के लोग और महिलाएं बिलख रहे परिवार वालों को ढांढस बंधा रहे थे।
ओवरटेक बनी हादसे की वजह
सड़क किनारे लगे जिस सूखे पेड़ की वजह से यह हादसा होना बताया जा रहा था वह पेड़ कुछ ही देर में काट कर हटा दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ओवरटेक के चक्कर में हादसा हुआ। हालांकि मानक से ज्यादा सवारियां, फिटनेस की अनदेखी और गति पर लगाम न होना व अनट्रेंड चालकों के हाथों में स्टेयरिंग होना कोई नई बात नहीं। पुलिस और परिवहन विभाग हादसे के बाद बगलें झांकते नजर आते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पुलिस ने बस और उसके चालक को बस अड्डे से हिरासत में ले लिया था। इसके बावजूद बस चालक का नाम बताने से पुलिस कतराती दिखी।
सड़क हादसे में चार की मौत से बिखर गया परिवार
शनिवार शाम घर से बहन की बीमार सास को देखने मां व भाभी के साथ निकले सरवन को क्या पता था कि अब वह दुबारा कभी लौटकर घर नही पहुंच पाएगा। रविवार की सुबह करीब आठ बजे बहन की ससुराल फूलबेहड़ के पकरिया गांव से एक बाइक पर चार लोग सवार होकर अपने घर आ रहे थे। घर से करीब एक किलोमीटर पहले ही बस की चपेट में आने से चारों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
श्रीराम के दो पुत्र रमा कांत व सरवन थे। दोनों की शादी भी हो चुकी थी। पिता के बुजुर्ग होने से सरवन किसानी करता था तो रमाकांत भैंसों को चारा देना व दूध निकालने का काम किया करते थे। श्रीराम के मुताबिक, दोनों भाइयों में खूब बनती थी। सरवन की पत्नी ज्योति मानो सुध बुध खो बैठी है।
बच्चों के सिर से उठा मां का साया
प्रज्ञा की मौत ने उसके पति रमाकांत को झकझोर कर रख दिया। वही तीनों बच्चे अमन (11), अमित (7) और एक बेटी लक्ष्मी (9) के सिर से मां की गोद छिन गई। पूरे परिवार की जिम्मेदारी रमाकांत के कंधों पर आ गई है।