फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

आठ पुलिसकर्मियों के हत्यारे विकास दुबे के छोटे भाई दीपक पर क्यों मेहरबान थी कानपुर-कानपुर देहात पुलिस

Fri, 25 Dec 2020 04:21 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 25 Dec 2020 04:21 PM IST
विज्ञापन
Why the Kanpur and Kanpur dehat police was kind to Vikas Dubey's younger brother Deepak
विकास दुबे - फोटो : amar ujala
दहशतगर्द विकास दुबे का भाई दीपक दुबे भी अपराध की दुनिया में उसका बराबर का साथी रहा। हत्याएं कीं, डकैती डाली और हत्या के प्रयास भी किए। उस पर केस भी दर्ज किए गए। जेल गया, सजा हुई लेकिन पुलिस की नजर में दीपक बड़ा अपराधी नहीं है। यही वजह है कि उसका नाम न तो कानपुर देहात पुलिस ने और न ही कानपुर नगर पुलिस ने टॉप-10 अपराधियों की सूची में डाला। 


 
Why the Kanpur and Kanpur dehat police was kind to Vikas Dubey's younger brother Deepak
विकास दुबे (जैकेट में) को पकड़ने गई पुलिस टीम पर हुआ था हमला - फोटो : amar ujala
दीपक पर सात केस शिवली थाने में दर्ज हैं। इसमें दो हत्या के हैं। सन 2000 में स्कूल प्रिंसिपल सिद्धेश्वर पांडेय की हत्या में उसे उम्रकैद की सजा हुई। इसके अलावा एक अन्य डकैती व हत्या का केस भी उस पर चला। कल्याणपुर थाने में उस पर बलवा का केस दर्ज हुआ। शिवली में दर्ज अन्य दो केसों में उस पर पुलिस पर हमला कर विकास दुबे को छुड़ाने का आरोप था।

 
Why the Kanpur and Kanpur dehat police was kind to Vikas Dubey's younger brother Deepak
उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार हुआ था विकास दुबे - फोटो : अमर उजाला
इतना बड़ा आपराधिक इतिहास होने के बावजूद दीपक दुबे को कानपुर देहात पुलिस ने शातिर अपराधियों की सूची में नहीं डाला। कानपुर नगर पुलिस का भी वही रवैया रहा। कानपुर पुलिस के अफसरों का कहना है कि केस शिवली में अधिक थे तो उसको उसी थाने से टॉप-10 में डाला जाना चाहिए था। अब एक केस लखनऊ के कृष्णानगर थाने और दो केस चौबेपुर थाने में दर्ज किए गए हैं। दीपक पर कुल केसों की संख्या 11 हो गई है। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन
Why the Kanpur and Kanpur dehat police was kind to Vikas Dubey's younger brother Deepak
विकास दुबे एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला
जमानत खारिज कराने का नहीं किया प्रयास
प्रिंसिपल हत्याकांड में दीपक पिछले 16 साल से जमानत पर बाहर था। जमानत के दौरान भी उस पर कल्याणपुर थाने में केस दर्ज हुआ लेकिन पुलिस ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की। गंभीर आपराधिक मामले होने के बावजूद भी पुलिस ने उसकी जमानत खारिज कराने का कोई प्रयास नहीं किया। 

 
विज्ञापन
Why the Kanpur and Kanpur dehat police was kind to Vikas Dubey's younger brother Deepak
विकास दुबे को पुलिस ने किया था गिरफ्तार - फोटो : ANI
विकास के समर्थकों पर अब तक कार्रवाई नहीं  
विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद सोशल मीडिया पर उसके पक्ष में तमाम समर्थक इकट्ठा हो गए थे। एक दर्जन पेज फेसबुक पर बनाए गए हैं। हजारों लोग उससे जुड़ चुके हैं। महीने भर पहले इसकी जानकारी पुलिस को हुई थी। फेसबुक पेज ब्लॉक करवाकर इन समर्थकों पर कार्रवाई करने की बात कही थी लेकिन अभी तक पुलिस इन पेज को ब्लॉक तक नहीं करवा सकी है। एसपी ग्रामीण ने बताया कि मामले में कार्रवाई जारी है। 

दीपक दुबे ने लखनऊ कोर्ट में सरेंडर किया है। चौबेपुर थाने में दर्ज किये गए केस में वारंट तामील कराया जाएगा। जिन मामलों में दीपक जमानत पर है उन सभी में जमानत खारिज कराई जाएगी। इसके लिए एसपी ग्रामीण को निर्देश दिए गए हैं।
डॉ. प्रीतिंदर सिंह, डीआईजी

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed