उत्तर प्रदेश के कानपुर में रेलवे की जमीन का कागजों पर सौदा होता गया और रेलवे अफसरों को भनक तक नहीं लगी। लगभग तीन दशक पहले रेलवे अफसरों ने भुर्जी का काम करने वाले को 300 वर्ग फीट की जो जगह सिर्फ 50 रुपये किराये पर झोपड़ी बनाने को दे दी थी, वह कागजों पर बिकते-बिकते पांच लाख की हो गई।
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जय बाजपेयी पत्नी श्वेता एवं विकास दुबे
- फोटो : amar ujala
जय बाजपेई के भाई रजय और उसके गुर्गों की करामात से रेलवे की इस जमीन पर अब पक्की दुकान बन चुकी है। सूत्रों के अनुसार ब्रह्मनगर चौराहे के पास रामबाग स्थित उखड़ी रेलवे लाइन पर भुर्जी का काम करने वाले दुक्खी ने झोपड़ी बनाकर अवैध कब्जा कर लिया।
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विकास दुबे का साथी जय बाजपेयी
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रेलवे अफसरों से साठगांठ कर 300 वर्ग फीट की इस जगह का 50 रुपये प्रतिमाह किराया भी जमा होने लगा। सितंबर 1987 में दुक्खी ने प्लाट का मलबा बेचने की बात कहकर सादे कागज पर लिखापढ़ी की और ब्रह्मनगर निवासी गंगाप्रसाद को 3250 रुपये में यह जमीन दे दी।
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विकास का खजांची जय बाजपेयी
- फोटो : amar ujala
गंगाप्रसाद ने लोहारन का भट्ठा जीटी रोड निवासी पुष्पा देवी से 30 हजार रुपये लेकर यह जगह स्थानांतरित कर दी। जगह की लिखापढ़ी नोटरी की मुहर के साथ सिर्फ 10 रुपये के स्टांप पर हो गई। पुष्पा ने यह जमीन रजय की पत्नी प्रभा व नौकरानी पूनम निषाद के नाम 9 मई 2017 को तीन लाख रुपये में कर दी।
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विकास दुबे: जय बाजपेयी
- फोटो : amar ujala
रेलवे की इस जमीन की मालकिन बनने का दावा करने वाली प्रभा और पूनम ने इसी साल 20 जनवरी को सीटीआई निवासी गौरव रमानी से पांच लाख में एग्रीमेंट कर जमीन उन्हें दे दी। इसकी लिखापढ़ी भी नोटरी की मुहर के साथ सौ रुपये के स्टांप पर की गई।
हमारे पास ऐसे किसी प्रकरण की जांच नहीं है। न ही मेरे संज्ञान में ऐसा कोई मामला है, जिस क्षेत्र की बात हो रही है वह लखनऊ मंडल का नहीं है। -
संजय यादव, सीनियर डीईएन कोऑर्डिनेशन, लखनऊ मंडल, पूर्वोत्तर रेलवे
अभी तक ऐसी कोई जानकारी नहीं है। संबंधित अफसरों से पता करने के बाद ही इस संबंध में जानकारी दे सकूंगा।
राजेंद्र सिंह, पीआरओ, इज्जतनगर मंडल, पूर्वोत्तर रेलवे