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बिकरू कांड: बसपा नेता के रिश्तेदार ने खरीदी दीपक दुबे की सेमी आटोमेटिक राइफल, एसटीएफ के हाथ लगी अहम जानकारी
Wed, 03 Mar 2021 03:57 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 03 Mar 2021 03:57 PM IST
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विकास दुबे गैंग के सात मददगार गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
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विकास दुबे व उसके गुर्गों को शरण देने और असलहों की खरीद-फरोख्त करने वालों से एसटीएफ के हाथ अहम जानकारी लगी है। पता चला है कि विकास के भाई दीपक दुबे की सेमी आटोमेटिक राइफल भिंड के रहने वाले बंटी ने 24 जनवरी को इन आरोपियों से खरीदी थी। पूरी डील भिंड देहात (मध्यप्रदेश) निवासी बसपा नेता सत्यवीर सिंह यादव के होटल में हुई थी।
विकास दुबे (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
एक डबल बैरल बंदूक भी बंटी के पास है। सत्यवीर के रिश्तेदार बंटी की गिरफ्तारी और असलहों की बरामदगी के लिए एसटीएफ ने मध्यप्रदेश में डेरा डाल दिया है। कई लोग हिरासत में भी लिए गए हैं। एसटीएफ ने विकास दुबे, अमर दुबे और प्रभात मिश्रा को शरण देने वालों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इसमें कानपुर देहात के विष्णु कश्यप, अमन शुक्ला, रामजी, अभिनव तिवारी, संजय परिहार, शुभम पाल के अलावा असलह खरीदने वाला भिंड का मनीष यादव शामिल है।
कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
एसटीएफ ने इनके पास से एक सेमी आटोेमेटिक राइफल के साथ ही कई असलह बरामद किए हैं। हालांकि दीपक दुबे की सेमी आटोमेटिक राइफल व डबल बैरल बंदूक नहीं मिली है। एसटीएफ की जांच के मुताबिक 24 जनवरी को ये दोनों असलहे बंटी को बेचे गए। उसके घर में भी दबिश दी गई लेकिन न तो वह मिला और न ही असलह बरामद हुए।
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विकास दुबे एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
असलहों का शौकीन है सत्यवीर, इसमें भी लगाया है पैसा
एसटीएफ के सूत्रों के मुताबिक सत्यवीर सिंह असलहों का शौकीन है। उसके पास छह लाइसेंसी असलहे हैं। बिकरू कांड से जुड़े असलहों की खरीद-फारोख्त में उसी की मुख्य भूमिका है। सूत्रों ने बताया कि बंटी समेत अन्य उसके साथी आर्थिक रूप से बहुत मजबूत नहीं हैं। मनीष भी एक चाय व पान की दुकान चलाता है। ऐसे में पांच-छह लाख रुपये के असलहों की डील करने के पीछे सत्यवीर का ही हाथ है। आशंका है कि उसी ने असलहों की रकम चुकाई और असलहे इन सभी को दे दिए।
एसटीएफ के सूत्रों के मुताबिक सत्यवीर सिंह असलहों का शौकीन है। उसके पास छह लाइसेंसी असलहे हैं। बिकरू कांड से जुड़े असलहों की खरीद-फारोख्त में उसी की मुख्य भूमिका है। सूत्रों ने बताया कि बंटी समेत अन्य उसके साथी आर्थिक रूप से बहुत मजबूत नहीं हैं। मनीष भी एक चाय व पान की दुकान चलाता है। ऐसे में पांच-छह लाख रुपये के असलहों की डील करने के पीछे सत्यवीर का ही हाथ है। आशंका है कि उसी ने असलहों की रकम चुकाई और असलहे इन सभी को दे दिए।
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली में भी खोजबीन
किसान का बेटा बंटी भी असलहों का शौकीन है। सत्यवीर के माध्यम से वह भी असलह रखता है। एसटीएफ उसकी तलाश में मध्यप्रदेश में डेरा जमाए है। वहीं असलहों की डील कराने वाले कानपुर देहात निवासी संजय की फैक्टरी दिल्ली में है। ऐसे में आशंका है कि बंटी दिल्ली में भी हो सकता है। एक टीम ने दिल्ली पुलिस से भी संपर्क किया है।
सिफारिश कराने में जुटा रहा सत्यवीर
एसटीएफ ने मध्यप्रदेश में जाकर जब कार्रवाई शुरू की तो सत्यवीर सिफारिश करने में जुट गया। कई बड़े नेताओं से फोन कराए। स्थानीय पुलिस ने भी उसका पक्ष लिया। हालांकि एसटीएफ ने किसी की न सुनी और कार्रवाई जारी रखी।
किसान का बेटा बंटी भी असलहों का शौकीन है। सत्यवीर के माध्यम से वह भी असलह रखता है। एसटीएफ उसकी तलाश में मध्यप्रदेश में डेरा जमाए है। वहीं असलहों की डील कराने वाले कानपुर देहात निवासी संजय की फैक्टरी दिल्ली में है। ऐसे में आशंका है कि बंटी दिल्ली में भी हो सकता है। एक टीम ने दिल्ली पुलिस से भी संपर्क किया है।
सिफारिश कराने में जुटा रहा सत्यवीर
एसटीएफ ने मध्यप्रदेश में जाकर जब कार्रवाई शुरू की तो सत्यवीर सिफारिश करने में जुट गया। कई बड़े नेताओं से फोन कराए। स्थानीय पुलिस ने भी उसका पक्ष लिया। हालांकि एसटीएफ ने किसी की न सुनी और कार्रवाई जारी रखी।