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यूपी डिफेंस एक्सपो-2018: इन उत्पादों की खासियत जानकर आप भी कहेंगे - 'वाह क्या खोज है'
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 15 Nov 2018 08:13 PM IST
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कानपुर के चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (सीएसए) परिसर में लगी यूपी डिफेंस एक्सपो-2018 में हैरान कर देने वाले उत्पाद प्रदर्शनी में लगाए गए हैं। इन उत्पादों की खासियत जानकर आप भी कहेंगे - 'वाह क्या खोज है'
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त्वचा की समस्याओं का भी समाधान
सुरक्षा बलों के रहन-सहन की स्थिति को भांपते हुए डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ फिजियोलॉजी एंड एलाइड साइंसेस (डिपास), दिल्ली ने त्वचा की रक्षा में कारगर क्रीम का विकास किया है। डिपास की वैज्ञानिक डॉ. प्रियंका शर्मा ने बताया कि अत्यधिक ठंडे इलाकों में तैनात सशस्त्र सैन्य बलों के जवानों को शीतदंश (फ्रास्टबाइट) की समस्या का सामना करना पड़ता है। ठंड के कारण होंठ, गाल और उंगलियों में दरारें पड़ जाती हैं। इसके लिए डिपास की ओर से एलोकेल नाम क्रीम बनाई गई। डिपास ने घाव को भरने, त्वचा के अन्य रोगों में लाभप्रद हर्बोहीलर नामक क्रीम भी बनाई है। यह चोट के घावों, खरोंच, चीरा, पुराने जख्म, शुगर के कारण हुए घाव को भरने में कारगर है। यह दोनों क्रीम आम लोगों के लिए भी उपलब्ध हैं।
सुरक्षा बलों के रहन-सहन की स्थिति को भांपते हुए डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ फिजियोलॉजी एंड एलाइड साइंसेस (डिपास), दिल्ली ने त्वचा की रक्षा में कारगर क्रीम का विकास किया है। डिपास की वैज्ञानिक डॉ. प्रियंका शर्मा ने बताया कि अत्यधिक ठंडे इलाकों में तैनात सशस्त्र सैन्य बलों के जवानों को शीतदंश (फ्रास्टबाइट) की समस्या का सामना करना पड़ता है। ठंड के कारण होंठ, गाल और उंगलियों में दरारें पड़ जाती हैं। इसके लिए डिपास की ओर से एलोकेल नाम क्रीम बनाई गई। डिपास ने घाव को भरने, त्वचा के अन्य रोगों में लाभप्रद हर्बोहीलर नामक क्रीम भी बनाई है। यह चोट के घावों, खरोंच, चीरा, पुराने जख्म, शुगर के कारण हुए घाव को भरने में कारगर है। यह दोनों क्रीम आम लोगों के लिए भी उपलब्ध हैं।
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लेजर लाइट से छुपे दुश्मनों की पहचान
लेजर साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर (लेस्टेक), दिल्ली की ओर से विकसित शार्ट रेंज ऑप्टिकल टारगेट लोकेटर 600 मीटर दूरी तक छुपे दुश्मनों का खामोशी से पता लगा लेता है। किसी वीआईपी मूवमेंट से पहले सुरक्षा बल इसकी मदद से उस क्षेत्र में छुपे स्नाइपर, दूरबीन से नजर रखने वालों आदि की न केवल पहचान कर सकते हैं, बल्कि उनकी लोकेशन की भी जानकारी कर लेते हैं। डीआरडीओ दिल्ली के वैज्ञानिक डॉ. मनीष भारद्वाज, राजेश जैश, डॉ. गोवर्धन लाल व राजेश तिवारी ने बताया कि एसपीजी और दिल्ली पुलिस इसका इस्तेमाल कर रही है। सेना को डेढ़ किलोमीटर तक क्षमता वाले लोकेटर दिए गए हैं। लोकेटर के जरिए अदृश्य लेजर किरणें निकलती हैं। इनकी राह में जो भी आब्जेक्ट (वस्तु, व्यक्ति) आता है, उसकी जानकारी दे देती है।
लेजर साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर (लेस्टेक), दिल्ली की ओर से विकसित शार्ट रेंज ऑप्टिकल टारगेट लोकेटर 600 मीटर दूरी तक छुपे दुश्मनों का खामोशी से पता लगा लेता है। किसी वीआईपी मूवमेंट से पहले सुरक्षा बल इसकी मदद से उस क्षेत्र में छुपे स्नाइपर, दूरबीन से नजर रखने वालों आदि की न केवल पहचान कर सकते हैं, बल्कि उनकी लोकेशन की भी जानकारी कर लेते हैं। डीआरडीओ दिल्ली के वैज्ञानिक डॉ. मनीष भारद्वाज, राजेश जैश, डॉ. गोवर्धन लाल व राजेश तिवारी ने बताया कि एसपीजी और दिल्ली पुलिस इसका इस्तेमाल कर रही है। सेना को डेढ़ किलोमीटर तक क्षमता वाले लोकेटर दिए गए हैं। लोकेटर के जरिए अदृश्य लेजर किरणें निकलती हैं। इनकी राह में जो भी आब्जेक्ट (वस्तु, व्यक्ति) आता है, उसकी जानकारी दे देती है।
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निशंक की क्षमता बढ़ी
एक्सपो में फील्ड गन फैक्ट्री की ओर से विकसित की गई रिवाल्वर निशंक को देखने वालों की खासी भीड़ उमड़ी। युवाओं के बीच रिवाल्वर लेकर चलाने, सेल्फी लेने का क्रेज दिखा। अधिकारियों ने बताया कि निशंक में फायर करने पर अपेक्षाकृत कम ताकत लगती है। इनकी बैरल की लंबाई भी बढ़ाई गई है। इससे इसकी मारक क्षमता 15 मीटर तक हो गई है। जल्द ही इसकी कीमत तय की जाएगी। इसके बाद यह लोगों के लिए उपलब्ध होगी।
एक्सपो में फील्ड गन फैक्ट्री की ओर से विकसित की गई रिवाल्वर निशंक को देखने वालों की खासी भीड़ उमड़ी। युवाओं के बीच रिवाल्वर लेकर चलाने, सेल्फी लेने का क्रेज दिखा। अधिकारियों ने बताया कि निशंक में फायर करने पर अपेक्षाकृत कम ताकत लगती है। इनकी बैरल की लंबाई भी बढ़ाई गई है। इससे इसकी मारक क्षमता 15 मीटर तक हो गई है। जल्द ही इसकी कीमत तय की जाएगी। इसके बाद यह लोगों के लिए उपलब्ध होगी।
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घायल जवानों की रक्षा करेगा कंबल
सियाचिन जैसे दुर्गम बर्फीले स्थानों पर तैनात सैनिकों के घायल होने पर इलाज मिलने तक सबसे पहली जरूरत उनके शरीर को गर्म रखने की होती है। डीएमएसआरडीई, कानपुर के वैज्ञानिक (जी) एडिशनल डायरेक्टर डॉ. डीएन त्रिपाठी ने बताया कि संस्थान ने जवानों के शरीर को गर्म रखने वाला बेहद हल्का कंबल बनाया है। सरवाइवल ब्लैंकेट नामक यह कंबल घायल जवान के शरीर से लपेट दिया जाता है। इससे उसके शरीर की ऊष्मा सुरक्षित रहती है। इस कंबल को रुमाल की तरह लपेटकर जेब में रखा जा सकता है।
सियाचिन जैसे दुर्गम बर्फीले स्थानों पर तैनात सैनिकों के घायल होने पर इलाज मिलने तक सबसे पहली जरूरत उनके शरीर को गर्म रखने की होती है। डीएमएसआरडीई, कानपुर के वैज्ञानिक (जी) एडिशनल डायरेक्टर डॉ. डीएन त्रिपाठी ने बताया कि संस्थान ने जवानों के शरीर को गर्म रखने वाला बेहद हल्का कंबल बनाया है। सरवाइवल ब्लैंकेट नामक यह कंबल घायल जवान के शरीर से लपेट दिया जाता है। इससे उसके शरीर की ऊष्मा सुरक्षित रहती है। इस कंबल को रुमाल की तरह लपेटकर जेब में रखा जा सकता है।