भाजपा की विधायक द्वारा हमीरपुर जिले के एक एेतिहासिक मंदिर में प्रवेश से बड़ा बखेड़ा खड़ा हो गया है। भाजपा विधायक मनीषा अनुरागी कुछ दिन पहले ही ध्रूम ऋषि के मंदिर में माथा टेकने पहुंची थीं। विधायक के जाने के बाद गांववालों ने मंदिर को न केवल गंगा जल से शुद्ध कराया बल्कि मंदिर के अंदर विराजमान देवता को प्रयाग ले जाकर गंगा स्नान कराने की बातें भी सामने आ रही हैं। मंदिर में हवन पूजन, भागवत कथा कराने के साथ-साथ कन्या भोज भी हुआ है। इसकी वजह केवल इतनी थी कि मंदिर में विधायक मनीषा ने प्रवेश किया था।
टकराया 'संविधान और मंदिर का विधान', भाजपा विधायक के पैर रखते ही 'अपवित्र हुआ मंदिर', हुआ ये सब
हमीरपुर मुस्करा खुर्द गांव में सैकड़ों साल पुराना ध्रूम ऋषि का मंदिर हैं। जहां पर दर्जनों गांवों के ग्रामीणों की आस्था जुड़़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मंदिर के अंदर महिलाओं और कन्याओं का जाना पुरातन काल से पूर्णतया वर्जित है। मंदिर में जाने वाली महिलाएं बाहर से दर्शन कर लौट जाती है। 12 जुलाई को विधायक मनीषा अनुरागी मुस्करा खुर्द गांव के प्राथमिक विद्यालय में ड्रेस वितरण कार्यक्रम में शामिल हुईं थी। तब गांव के कुछ लोग विधायक को मंदिर परिसर में सीसी सड़क बनवाने के लिए ले गए। इस दौरान विधायक ने ग्रामीणों के साथ ध्रूम ऋषि मंदिर में प्रवेश कर चबूतरे पर बैठकर माथा टेका था। मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक के बावजूद उस दौरान मौजूद तमाम गांववालों में किसी ने भी विधायक को इस बारे में जानकारी नहीं दी।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- दैवीय आपदा से भयभीत हुए ग्रामीण...
अब यहीं से महिला विधायक के मंदिर में प्रवेश करने की बात फैल गई। विधायक के मंदिर में प्रवेश को लेकर ग्रामीण अशुद्ध मानकर किसी दैवीय आपदा से भयभीत हो गए। इस मामले के दस दिन बाद 22 जुलाई को गांव के महेश, शिवनारायन, सुरेश, किशनलाल, भवानीदीन, जगदीश सहित करीब आधा सैकड़ा ग्रामीण निजी वाहनों से अपने खर्चे से प्रयागराज गंगा स्नान के लिए गए थे। वापस लौटकर ग्रामीणों ने पंडित श्यामलाल रजौनी वालों से गंगाजल से मंदिर शुद्धिकरण कर कथा पूजन और कन्या भोज कराकर पुन: धूम ऋषि की फूलों की पालकी की स्थापना कराई गई थी। महिला विधायक के मंदिर में प्रवेश करने से गांववाले आस्था को ठेस पहुंचना बता रहे हैं। 15 दिन बाद मामले के गरमाने पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- ग्रामीणों के कहने पर मंदिर के अंदर विधायक ने किया था प्रवेश....
प्रधान ओमप्रकाश का कहना है कि विद्यालय में ड्रेस वितरण करने विधायक 12 जुलाई को आईँ। तब मंदिर परिसर में सीसी सड़क की मांग को लेकर करीब एक सैकड़ा ग्रामीण विधायक को मंदिर ले गए थे। आरोप लगाया कि जिस समय विधायक मंदिर में जाकर माथा टेक रहीं थीं तब किसी ने भी मंदिर के अंदर महिलाओं के प्रवेश वर्जित की बात नहीं कही। प्रधान ने कहा कि उनके अनुसार गांव के इस मंदिर में ऐसी कोई परंपरा नहीं है। घटना के करीब 15 दिन बाद मीडिया के माध्यम से कुछ लोगों ने साजिश रचकर मामला उछाला है। वहीं पूर्व प्रधान भरत राजपूत ने भी ग्राम प्रधान की बात का समर्थन करते हुए महिला विधायक का मंदिर में जाने का दोषी ग्रामीणों को बताया है। उनका कहना है कि यदि वहां मौजूद लोग उन्हें रोकते तो विधायक मंदिर के अंदर नहीं जातीं। पूर्व प्रधान ने बताया कि मंदिर में स्थापित देवी देवताओं को गंगा स्नान के लिए एक साल से तैयारी चल रही थी। वहीं दबी जुबान से कुछ ग्रामीण इस प्रकरण को साजिश बता रहे हैं।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- पांडवों के गुरू थे ध्रूम ऋषि...
ग्रामीणों के अनुसार ध्रूमऋषि पांडवों के गुरू बताए गए हैं। गांव के 74 वर्षीय प्रभुदयाल का कहना था कि अज्ञातवास के समय पांडव यहां आए थे और धूम ऋषि ने उन्हें राजा विराट की नगरी में अज्ञातवास गुजारने की बात कही थी। जो उन्होंने अपने पूर्वजों से सुना है।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- ध्रूमऋषि मंदिर को मानते आस्था का केंद्र ...