ठंड से उठा जोड़ों में दर्द, उंगलियां पड़ने लगीं नीली, तकलीफों से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय
कानपुर हैलट अस्पताल के अस्थि रोग विभाग में रुमेटॉयड गठिया के मरीजों की हालत बिगड़ रही है। इसके साथ ही जो लोग पिछले दिनों डेंगू, चिकुनगुनिया की चपेट में आए हैं, उन्हें रिएक्टिव गठिया हो रहा है। कुछ रोगी चल न पाने के कारण व्हील चेयर पर डाक्टरों को दिखाने के लिए आए। जोड़ों के दर्द के अलावा लोगों को सांस की तकलीफ भी हो रही है। मेडिसिन विभाग में आने वाले रोगियों में सांस की तकलीफ और गले में संक्रमण पाया गया।
अस्थि रोग विभाग के विशेषज्ञ डॉ. प्राग्नेश कुमार ने बताया कि ठंड में जोड़ सख्त होने लगते हैं, इससे रोगी की तकलीफ दोगुना हो जाती है। इसमें रोगियों की दवाएं बढ़ानी पड़ती हैं। इसके अलावा उंगलियों में खून का बहाव प्रभावित होने से रेनोड नामक बीमारी के मरीजों की उंगलियां नीली पड़ जाती हैं। इसके साथ ही घाव हो जाते हैं। डॉ. जेएस कुशवाहा ने बताया कि ओपीडी में सांस में तकलीफ और गले के संक्रमण के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। वहीं कार्डियोलोजी की इमरजेंसी में शुक्रवार-शनिवार रात 12 बजे के बाद शाम 6 बजे तक 56 रोगी आए।
अपनाएं ये उपाय...
-गठिया के मरीज व्यायाम करें, जिससे जोड़ सख्त न हों
-सुबह धूप निकलने के बाद बाहर टहलने जाएं, रात में घर में व्यायाम करें
-तकलीफ बढ़ने पर फिजियोथेरेपिस्ट की मदद ले सकते हैं
-नसों के मरीज ठंडे पानी में सीधे हाथ न डालें
-बाहर निकलने पर दस्ताने और मौजे पहने रहें
-उंगलियां नीली पड़ें तो आग में हाथ सेंक सकते हैं
गर्भवती महिलाएं पानी पिएं, बीपी कंट्रोल रखें
प्रदूषण और ठंडक के माहौल में गर्भवती महिलाएं अपना ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल रखें। मेडिकल कालेज की स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. किरन पांडेय ने बताया कि गर्भवती महिलाएं ठंड में सादा पानी पीती रहें। ठंड की वजह से पानी न पीने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। ऐसे मौसम में ब्लड प्रेशर और जेस्टेशनल डायबिटीज होती है। इसे नियंत्रित रखें। सुबह और सूर्यास्त के बाद बाहर न निकलें। सर्द-गर्म से बचें।