रासायनिक खादों के दुष्प्रभाव से बचने और सेहतमंद रहने के लिए लोग अपने घरों के लॉन, छत, आंगन और फ्लैट के छज्जों पर गमलों में आर्गेनिक पद्धति से अपने खाने भर की सब्जियां उगाएं।
कानपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जम्मू-कश्मीर कृषि विवि के कुलपति डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा ने बताया कि बारिश के पानी को संरक्षित करके इसका पीने के लिए इस्तेमाल करें। इससे जलजनित बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि पानी अब पूंजी हो गया है।
जम्मू-कश्मीर कृषि विवि के कुलपति डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा ने कुलपति सम्मेलन के तकनीकी सत्र में वर्षा जल संरक्षण की परंपरागत और आधुनिक तकनीक के संबंध में बताया। उन्होंने कहा कि दोनों तकनीकों का मिश्रित प्रयोग किया जाए। खासतौर पर शहरी क्षेत्र के लोग रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग करें। छतों पर शीट लगा दें जिससे पानी एक जगह इकट्ठा होता रहे।
इसके बाद शोधन करके इसका पीने में इस्तेमाल करें। हार्वेस्टिंग न होने से 70 फीसदी बारिश का पानी बेकार बह जाता है। उन्होंने बताया कि थाईलैंड में लोग साल के छह महीने छतों से इकट्ठा किया गया बारिश का पानी पीते हैं।
इसके साथ ही विज्ञानियों ने बताया कि फलों, सब्जियों में आने वाले रासायनिक खादों के जहरीले तत्वों के नुकसान से बचाव के लिए लोग अपने खाने भर की सब्जियां घरों में ही उगा सकते हैं। बंगलों के लॉन और घरों के आंगन में भिंडी, मूली, आलू, टमाटर तथा लताओं वाली सब्जियों को उगाया जा सकता है।