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मोइन कुरैशी और तारीख '15 फरवरी साल 2014', चुनावी मुद्दा से लेकर सीबीआई में मचे घमासान तक सबकुछ

Sat, 27 Oct 2018 08:30 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 27 Oct 2018 08:30 AM IST
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Story of Meat businessman Moin Qureshi
डेमो पिक
15 फरवरी साल 2014...चरम पर चुनावी माहौल और कानपुर से संबंध रखने वाले मीट कारोबारी के 15 ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी। इसके बाद सामने आया एक ऐसा नाम जिसके बारे में शायद ही लोग इससे पहले कुछ जानते हों छापेमारी के बाद से ही वह सुर्खियों में आ गया, नाम था... मोइन कुरैशी। कानपुर से संबंध रखने वाले मोइन कुरैशी का जन्म रामपुर में हुआ था। मोइन की शिक्षा दून स्कूल और सेंट स्टीफेंस से की हुई। 


 
Story of Meat businessman Moin Qureshi
डेमो पिक
15 फरवरी 2014 को चरम पर लोकसभा के चुनावी माहौल के बीच इसी दिन कानपुर से ताल्लुक रखने वाले मीट कारोबारी मोइन कुरैशी के 15 ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी हुई। इसके बाद जो सच सामने आया उससे जन्म हुआ एक चुनावी मुद्दे का। इसी को लेकर भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने इशारे ही इशारे में एक रैली में कहा ...‘क्या सच्चाई सामने नहीं आनी चाहिए?’।

 
Story of Meat businessman Moin Qureshi
डेमो पिक
इसके बाद मचा सियासी घमासान...जिसमें आरोपों का दौर शुरू हुआ। भाजपा ने विपक्ष के एक नेता का इशारो में नाम लेते हुए मोइन कुरैशी से संबंध होने की बात कही। अब जानिए मोइन कुरैशी के शुरुआती दौर से बारे में... रामपुर में जन्मा मोइन अख्तर कुरैशी उत्तर प्रदेश के कानपुर से ताल्लुक रखता है। साल 1993 में उसने कानपुर और रामपुर में छोटा सा बूचड़खाना खोला था और जल्द ही वह देश का सबसे बड़ा मांस कारोबारी बन बैठा।
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Story of Meat businessman Moin Qureshi
मोइन कुरैशी
पच्चीस सालों से मोइन ने निर्माण और फैशन समेत कई क्षेत्रों में 25 से ज्यादा कंपनियां खड़ी कर लीं। उसके खिलाफ कर चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार में शामिल होने के कई आरोप लगे और जांच हुई। इसके साथ-साथ उसने हवाला के जरिए बड़ा लेनदेन किया। उस पर सीबीआई अफसरों, राजनेताओं समेत कई अधिकारियों को रिश्वत देने के भी आरोप लगे। मोइन कुरैशी का नाम सबसे पहले 2014 में सामने आया, जब यह पता चला कि 15 महीने में कुरैशी कम से कम 70 बार तत्कालीन सीबीई चीआफ रंजीत सिन्हा के घर पर गया था।
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moin qureshi - फोटो : SELF
आलोक वर्मा और अस्थाना के बीच मौजूदा विवाद में हैदराबाद के बिजनसमैन सतीश बाबू सना का नाम भी सामने आया है। सना ने पिछले साल ईडी को कथित तौर पर बताया था कि उसने सिन्हा के जरिए एक सीबीआई केस में फंसे अपने दोस्त को जमानत दिलाने के लिए 1 करोड़ रुपये कुरैशी को दिए थे। साल 2014 में पता चला कि कुरैशी और एक अन्य सीबीआई डायरेक्टर एपी सिंह के बीच मैसेज का आदान-प्रदान हुआ था। सिंह 2010 से 2012 तक एजेंसी के हेड रहे।
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