फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

इंटरनेट और आधुनिक फिल्मों के दौर में फिर उठने लगे 'रंगमंच के पर्दे', जानिए क्या है इसकी वजह

Sat, 30 Jun 2018 01:10 PM IST
शैली भल्ला, अमर उजाला, कानपुर
शैली भल्ला, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 30 Jun 2018 01:10 PM IST
विज्ञापन
Story about theatre culture of kanpur
डेमो पिक
सन् 1960 से 1980  के आसपास यूपी के कानपुर शहर में रंगमंच का स्वर्णिम दौर था। अस्सी के दशक में विजय तेंदुलकर के नाटक सखाराम बाईंडर और बब्बन खान के नाटक अदरक के पंजे को देखने के लिए थियेटरों में भारी भीड़ उमड़ी थी। तब इनके टिकट की कीमत 15 रुपये थी। इसे खरीदने के लिए लंबी कतारें लगी थीं। दर्शकों की रुचि के चलते मर्चेंट चैंबर हॉल में सखा राम बाईंडर का पांच दिन और अदरक के पंजे का सात दिन तक मंचन हुआ था। रंगमंच की रंगीन दुनिया 1990 के बाद दम तोड़ने लगी। सरकार की अनदेखी, इंटरनेट और आधुनिक फिल्मों के दौर ने रंगमंच को तगड़ा नुकसान पहुंचाया। रंगमंच कर्मी गुमनामी के अंधेरे में खो गए। हाल में ही शहरियों का रुख फिर थियेटरों की ओर हुआ है। इसे इस कला के लिए संजीवनी माना जा रहा है। हालिया वर्षों में कई नाटक भीड़ जुटाने में सफल रहे हैं। 

 

Story about theatre culture of kanpur
डेमो पिक
अनुकृति संस्था के डॉ. ओमेंद्र कुमार बताते हैं कि सन् 1960 में करीब दो दर्जन नाट्य संस्थाएं थीं। सन् 1990 में थियेटरों का बुरा दौर शुरू हो गया था। अब एक बार फिर से अच्छा दौर लौट रहा है। 2008 से 2011 के बीच बकरी और मोटेराम का सत्याग्रह नाटक दर्शकों को काफी पसंद आए थे। इसके बाद शहर में नाटकों की संख्या बढ़ने लगी है। अब वर्ष में करीब आठ से दस नाटक शहर में हो रहे हैं। जनवरी से अब तक तीन नाटकों का सफल मंचन हो चुका है। लाजपत भवन में डैड्स गर्लफ्रेंड और रागेंद्र स्वरूप आडिटोरियम में रांग नंबर नाटक में दर्शकों की काफी भीड़ जुटी थी। अच्छे दर्शक मिलने के कारण अब कई टीवी और फिल्मों के कलाकार भी यहां आने लगे हैं। 24 जून को प्रजा ही रहने दो नाटक के टिकट तो बकायदा वेबसाइट के जरिए बुक किए गए। टिकट बुकिंग से करीब 10 हजार रुपये जुटाए गए। नाटक देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे थे।  
 
Story about theatre culture of kanpur
डेमो पिक
सजावट व परिधान भी बदल गए 
पहले थियेटर में जहां केवल स्पॉट लाइट और बेबी लाइट होती थी वहीं अब ये एलईडी लाइट से सजाए जा रहे हैं। स्टैंडिंग माइक की जगह कार्डलेस, कॉलर, बटन और फ्लोर माइक ने ले ली है। यहीं नहीं परिधानों में भी काफी बदलाव आया है। अब इसके लिए अच्छा-खासा पैसा खर्च किया जा रहा है। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन
Story about theatre culture of kanpur
शबाना आजमी और फारुख शेख
फिल्मी कलाकार भी आ चुके 
हालिया वर्षों में अनुकृति संस्था की ओर से तुम्हारी अमृता प्ले का मंचन लाजपत भवन में हुआ था। इसमें शबाना आजमी और फारुख शेख ने अभिनय किया था। इसके अलावा एक अन्य नाटक सालगिरह के मंचन में अनुपम खेर और किरण खेर ने भाग लिया था। वहीं, मां अब रिटायर होती है नाटक के मंचन में शबाना आजमी, ग्रुशा कपूर, अवतार गिल ने अभिनय किया था। 
 
विज्ञापन
Story about theatre culture of kanpur
डेमो पिक
इन प्ले से मचा था हड़कंप
कानपुर शहर में सत्य घटना पर आधारित नाटक कमला से हड़कंप मचा था। प्ले के दौरान हंगामा न हो इसके लिए थियेटर के बाहर पुलिस फोर्स तैनात था। 
 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed