हर लड़की का ख्वाब हाेता है कि उसकी शादी बड़ी धूम धाम के साथ हाे। बैंड बाजा बारात अाैर डीजे की धुनाें के बीच वाे अपने हम सफर काे चुने पर शरिया कानून के तहत अगर शादी में डीजे या नाचगाना हाे ताे निकाह नहीं पढ़ा जाना चाहिये। यह बात कारी इम्तियाज अहमद महमूदी ने कही।
डीजे या नाचगाना हो वहां निकाह नहीं पढ़ाना चाहिए
तंजीम बरेलवी उलेमा-ए-अहले सुन्नत की ओर से सुजातगंज में जश्ने गौसुलवरा व इस्लाहे मुआशरा का पहला जलसा हुआ। इसमें गौस-ए-आजम शेख मुहिउद्दीन अब्दुल कादिर जीलानी की बारगाह में खिराजे अकीदत पेश की गई। कारी इम्तियाज अहमद महमूदी ने कहा कि जिस शादी में डीजे या नाचगाना हो, वहां किसी भी काजी को निकाह नहीं पढ़ाना चाहिए।
यह काम शरीअत के खिलाफ है
यह काम शरीअत के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि गौस-ए-आजम वलियों के सरदार है। उन्होंने 40 साल तक इशा की नमाज में वजू कर फजर की नमाज अदा की। वह शरीअत पर पाबंद थे। तंजीम के अध्यक्ष हाफिज व कारी सैयद मोहम्मद फैसल जाफरी, जामिया महदूमिया सिराजुल उलूम चंदारी के शेखुल हदीस मुफ्ती मोहम्मद कासिम रजा अमजदी ने जलसे को खिताब किया।
शरीयत जिसे शरीया कानून और इस्लामी कानून भी कहा जाता है
शरीयत में बहुत से विषयों पर मत है जैसे कि स्वास्थ्य, खानपान, पूजा विधि, व्रत विधि, विवाह, जुर्म, राजनीति, अर्थव्यवस्था इत्यादि। शरीयत जिसे शरीया कानून और इस्लामी कानून भी कहा जाता है। यह इस्लाम में धार्मिक कानून का नाम है।
शरीयत के अनुसार न्याय करने वाले पारम्परिक न्यायाधीशों को 'काजी' कहा जाता है
शरीयत के अनुसार न्याय करने वाले पारम्परिक न्यायाधीशों को 'काजी' कहा जाता है। इस्लाम के अनुयायियों के लिए शरीयत इस्लामी समाज में रहने के तौर-तरीकाें, नियमों और कायदों के रूप में कानून की भूमिका निभाता है।