कई वर्षों बाद अबकी सावन चारों सोमवार में विशेष योग का संयोग बन रहा है। जानकारों की मानें तो पहले और तीसरे सोमवार को पंचमी तो दूसरे और चौथे सोमवार को त्रियोदशी पड़ रही है। इस योग में विधि विधान से पूजन अक्षय पुण्य देने वाला होगा। इस दौरान भगवान शिव जलाभिषेक मात्र से प्रसन्न हो जाएंगे और शैव उपासकों पर विशेष कृपा बरसेगी।
सावन का पहला सोमवार आज, पड़ रहा विशेष संयोग, भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए अपनाएं ये पूजन विधि
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आचार्य विष्णु महाराज के अनुसार 22 जुलाई को पहला सोमवार पंचमी तिथि, कार्य सिद्ध करने वाला, मूसल योग, अमृत योग एवं सिद्ध योग पड़ रहा है।29 जुलाई को दूसरा सोमवार द्वादशी तिथि-त्रियोदशी तिथि, प्रदोष व्रत (कृष्ण पक्ष), आनंद योग, सर्वार्थसिद्धि व अमृत सिध्द योग में पड़ेगा। 5 अगस्त को तीसरा सोमवार पंचमी तिथि (नाग पंचमी) कार्य सिद्ध करने वाली, कल्की जयंती, सिद्ध योग व अमृत योग में पड़ेगा। 12 अगस्त को चौथा सोमवार द्वादशी / त्रियोदशी तिथि, प्रदोष व्रत पड़ेगा।
प्रत्येक सोमवार पूजा का समय
प्रातः 5:40 से 7:20, 9:20 से 10:45 बजे अमृत एवं शुभ के चैघड़िया मुहूर्त में।
अपराह्न 3:45 से सांय 7:15 तक लाभ, अमृत के चौघड़िया में।
शिव को प्रसन्न करने के उपाय
- शिव के इस अत्यधिक प्रिय श्रावण मास में महामृत्युंजय मंत्र, शिव सहस्त्रनाम, रुद्राभिषेक, शिव महिन्न स्त्रोत, महामृत्युंजय सहस्त्र नाम आदि मंत्रों का व्यक्ति जितना अधिक जाप कर सके उतना श्रेष्ठ होता है।
- स्कन्द पुराण के अनुसार प्रत्येक दिन एक अध्याय का पाठ करना चाहिए। यह माह मनोकामनाओं का इच्छित फल प्रदान करने वाला होता है। नियमपूर्वक शिव पर बिल्व पत्र प्रतिदिन निश्चित संख्या में (5, 11, 21, 51, 108 ) तथा अर्क (सफेद आक पुष्प) पुष्प चढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए।
- इस माह रुद्राष्टाध्यायी पाठ द्वारा शिव का पंचामृत से अभिषेक करना चाहिए तथा रुद्री पाठ द्वारा सहस्त्रधारा से अभिषेक करना चाहिए। इस माह में शिवपंचाक्षर मंत्र "ॐ नमः शिवाय" का जप भी उत्तम फल देने वाला है। इस माह में बिल्व वृक्ष तथा कल्प वृक्ष का भी पूजन करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
शिव पूजन व व्रत विधि
इस व्रत में भगवान शिव का पूजन करके एक ही समय भोजन किया जाता है। इस व्रत एवं पूजन में शिव एवं माता पार्वती का ध्यान कर शिव का पंचाक्षर मंत्र का जाप करते हुए पूजन करना चाहिए। सावन के प्रत्येक सोमवार को श्री गणेश जी, शिव जी, पार्वती जी तथा नंदी की पूजा करने का विधान है। शिव जी की पूजा में जल, दूध, दही, चीनी, घी, शहद, पंचामृत, कलावा, वस्त्र, यज्ञोपवीत, चंदन, रोली, चावल, फूल, बिल्व पत्र, दूर्वा, आक, धतूरा, कमलकट्टा, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, पंच मेवा, धूप, दीप, दक्षिणा सहित पूजा करने का विधान है। साथ ही कपूर से आरती करके भजन, कीर्तन और रात्रि जागरण भी करना चाहिए। पूजन के पश्चात रुद्राभिषेक भी कराना चाहिए। ऐसा करने से भोलेनाथ शिव शीघ्र ही प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। सोमवार का व्रत करने से पुत्र, धन, विद्या आदि मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।