फर्रुखाबाद जनपद में कांग्रेस का मतलब सलमान खुर्शीद है। इसका कारण है कि वह कांग्रेस के बड़े नेता हैं। साथ ही लगातार यहां से चुनाव लड़ते आ रहे हैं। इस सीट से उन्हें जनता का जितना प्यार मिला, उससे भी ज्यादा दुत्कार सहनी पड़ी। यही कारण है कि इस सीट पर जितनी बार उन्हें जीत नसीब नहीं हुई उससे ज्यादा हारे हैं।
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सलमान खुर्शीद
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सलमान के नाना डॉ. जाकिर हुसैन देश के तीसरे राष्ट्रपति थे। पिता खुर्शीद आलम खान भी फर्रुखाबाद से सांसद रहे। इससे सलमान ने बचपन में ही राजनीति का ककहरा सीख लिया था। 27 साल की उम्र में ही वह राजनीति में सक्रिय हो गए। 1980 में उन्होंने पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के कार्यालय में विशेष अधिकारी के रूप में काम करना शुरू किया था।
1989 के चुनाव में वह सक्रिय राजनीति में उतर आए। कांग्रेस ने भी उन्हें फर्रुखाबाद सीट से प्रत्याशी घोषित कर दिया लेकिन जनता दल की लहर में संतोष भारतीय से हार गए। इसके दो साल बाद ही सरकार गिर गई। 1991 में दोबारा चुनाव हुए। इस बार सलमान ने अपने ही गांव के मोहम्मद अनवार खां को भारी मतों से हरा दिया।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद
दूसरी बार चुनाव लड़ रहे सलमान की यह पहली जीत थी। 1996 में फिर से चुनाव हुए। भाजपा ने अटल बिहारी बाजपेई के नेतृत्व में सरकार बनाई। इस बार फर्रुखाबाद से भाजपा प्रत्याशी सच्चिदानंद हरि साक्षी महाराज ने जीत दर्ज की। अनवार खां फिर दूसरे स्थान पर रहे जबकि सलमान को महज 16.75 फीसदी वोट ही मिले। ये सरकार भी ज्यादा दिन नहीं चली। 1998 में फिर चुनाव हुआ।
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सलमान खुर्शीद
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इस बार साक्षी महाराज फिर जीत गए। सपा के ही अरविंद प्रताप दूसरे स्थान पर रहे। सलमान को 25.51 फीसदी वोट मिले और लगातार दूसरी बार वह हार गए। चार बार चुनाव लड़ने के बाद उन्हें महज एक बार ही जीत मिली। इस पर 1999 के चुनाव में कांग्रेस ने सलमान खुर्शीद की पत्नी विधायक रहीं लुईस खुर्शीद पर दांव खेला।