कानपुर में साबरमती एक्सप्रेस के 22 डिब्बों के पटरी से उतरने के मामले में पुलिस को अभी भी कोई अहम व पुख्ता सबूत नहीं मिल सके हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जब तक मामले में फोरेंसिक टीम की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक मामले में कुछ भी कह पाना संभव नहीं है।
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रेल हादसे की जांच करती टीम
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस सूत्रों के मुताबिक कैटल गार्ड की ऊंचाई पटरी से छह इंच ऊपर होती है। ऐसे में बोल्डर उससे लड़े, यह स्थिति सामान्य नहीं लगती। बोल्डर पहिये से टकरा सकता है, लेकिन कैटल गार्ड को डैमेज नहीं कर सकता। पुलिस सूत्रों के अनुसार मामले में जब रिपोर्ट दर्ज कराने वाले वादी से बयान दर्ज किया गया।
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sabarmati express derail
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तब उन्होंने बयान में कहा कि वह मौके पर अकेले पहुंचे थे, जबकि विभाग के गार्ड आदि से बयान दर्ज करने पर पता चला कि वहां पर दो लोग और थे, जो गोविंदनगर व जूही की तरफ से आए थे। यह दो लोग कौन थे, इसके लिए पुलिस एक बार फिर से सारे सीसीटीवी कैमरे खंगाल रही है।
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रेल हादसे की जांच करती टीम
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तीसरे डिब्बे से ट्रेन पटरी से उतरी, ऐसा कैसे हो सकता है
रात का समय होने के कारण फुटेज साफ नहीं मिल पाए हैं। पुलिस सूत्रों का यह भी मानना है कि इंजन से कोई चीज टकराई है, तो उसके पीछे के डिब्बों को भी पटरी से उतरना चाहिए था, लेकिन इंजन के ठीक पीछे के दो डिब्बे आसानी से निकल गए और तीसरे डिब्बे से ट्रेन पटरी से उतरी, ऐसा कैसे हो सकता है।
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Sabarmati Express Derail
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ब्रेक लगा, यह तय है, लेकिन दिखा क्या, इसका जवाब खोजा जा रहा
डीसीपी वेस्ट राजेश कुमार सिंह के अनुसार इंजन में इमरजेंसी ब्रेक लगा, यह तय है। चालक का बयान है कि उसे कुछ दिखा था। पूछताछ और बयान में यह बात कहीं नहीं आई है कि उसे आखिर दिखा क्या था। पुलिस इसी सवाल का जवाब खोज रही है।