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कन्नौज से पटना तक गंगा में प्रदूषण का रेड जोन, इको-फ्लो और डॉल्फिन चार्टर बनेगा

Sun, 15 Dec 2019 01:20 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sun, 15 Dec 2019 01:20 PM IST
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Red zone of pollution in the Ganges from Kannauj to Patna
पीएम मोदी ने किया गंगा का निरीक्षण - फोटो : अमर उजाला
गंगा में प्रदूषण का रेड जोन कन्नौज से पटना तक फैला हुआ है। इस क्षेत्र में गंगा में सबसे अधिक प्रदूषण है। इस रेड जोन में कानपुर के अलावा प्रयागराज और वाराणसी भी शामिल हैं। रेड जोन में सबसे अधिक गंदगी गंगाजल में आकर मिलती है। गंगा का इको सिस्टम भी इसी पट्टी के दायरे में अधिक खतरे में है।


 
Red zone of pollution in the Ganges from Kannauj to Patna
पीएम मोदी एवं सीएम योगी ने किया निरीक्षण - फोटो : अमर उजाला
इस दूरी में इको फ्लो स्थापित करने के साथ ही गंगा के लिए अब डॉल्फिन चार्टर बनाया जाएगा। इससे जलीय जीवों के हैबीटेट फिर से आबाद होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय गंगा परिषद की पहली बैठक के एजेंडे में ये बिंदु प्राथमिकता पर रहे। 

 
Red zone of pollution in the Ganges from Kannauj to Patna
पीएम के आने से पहले ही सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे - फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय गंगा परिषद के एजेंडे में गंगा रेड जोन केंद्र बिंदु में रहा। इस रेड जोन के चार प्रमुख कारक चिन्हित किए गए हैं। इनमें प्रमुख कारण सीवर का पानी है और दूसरे स्थान पर औद्योगिक इकाइयों से निकली गंदगी है। इसके साथ ही ठोस कचरा भी गंगाजल की स्वच्छता को खंडित कर रहा है।

 
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Red zone of pollution in the Ganges from Kannauj to Patna
पीएम मोदी मुख्यमंत्रियों के साथ गंगा का निरीक्षण करते हुए - फोटो : अमर उजाला
गंगा को प्रदूषित करने का चौथा कारण ऐसे बिंदु हैं जिनका अभी निश्चित चिन्हीकरण नहीं हो सका है। ये बिंदु ऐसे स्थानों पर हैं जहां गंगा तट पर आबादी नहीं है। दूर-दराज के छोटे-छोटे नालों और नालियों से आकर गंदगी पानी में मिला करती है। गंगोत्री से नरौरा और कन्नौज में गंगा के पहुंचने के पहले प्रदूषण कम बताया गया है। इसी तरह पटना के आगे तुलनात्मक रूप से पानी में कम प्रदूषण बताया गया है।

 
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Red zone of pollution in the Ganges from Kannauj to Patna
पीएम मोदी सीएम योगी सीएम त्रिवेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला
नमामि गंगे परियोजना के तहत रेड जोन से प्रदूषण घटाने के साथ परिषद ने डॉल्फिन चार्टर में बेस लाइन स्थापित करके लक्ष्य निर्धारित करने, डॉल्फिन के निवास स्थलों को सुरक्षा और सामुदायिक प्रयासों से संरक्षण की दिशा में कार्य तेज किए जाएंगे। इसी तरह हरिद्वार से उन्नाव तक गंगा नदी में न्यूनतम पारिस्थितिक प्रवाह (इको फ्लो) को सुनिश्चित किया जाएगा। इसकी निगरानी की जिम्मेदारी केंद्रीय जल आयोग की रहेगी। 
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