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कोविंद जी दिल्ली के बजाय हीं कानेपुर मा रहौ- राजू श्रीवास्तव
Mon, 02 Dec 2019 12:38 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 02 Dec 2019 12:38 PM IST
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राजू श्रीवास्तव, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
- फोटो : अमर उजाला
दोस्तों कुछ लोगे कुदरती तौर पे सुन्दर होत हैं अउर बहुत बड़ी तादाद उन लोगन केर है जो आपन सुन्दरता से संतुष्ट नाहि होत हैं.. अईस लोग कॉस्मेटिक सर्जरी कराय से भी परहेज नाहि करत.. चाहे उई विराट वाली अनुष्का होंय या बरेली वाली चोपड़ा .. ये सब के चक्कर मा अजीब अजीब जॉब चलत हैं.. अपर लिप जॉब.. लोअर लिप जॉब.. अउर भईया ई तो आय औरतन के चोंचले.. मगर ई मामले मा तो आजकाल मरद लोग भी खूब बहादुरी दिखाय रहे हैं..
राजू श्रीवास्तव
अब मरद लोगे भी पार्लर मा जाय के खूब वैक्सिंग ऐक्सिंग करवाय लगे हैं.. सीने के बाल.. हाथ पैरन के बाल साफ करवाय मा आपन शान समझत हैं.. ई मामले मा आपन बॉलीवुड के एक्टर खास तौर पे बहुत आगे चलि रहे हैं.. वैक्सिंग कराय के बाद कोऊ कोऊ एक्टर का बदन तो अईस चिकना निकलत है कि आप उस पे कैरम खेलि सकत हौ.. अच्छा अब सिरिफ चेहरे नाहीं.. लोगे जिस्मानी तौर पे भी खूबसूरत दिखे चाहत हैं.. जेका देखौ वही डाईटिंग साईटिंग मा लगा पड़ा है..
राजू श्रीवास्तव
आजकाल सब खाय पिए वाली चीजें भी डाइट हुई जाय रहीं.. कौनो डाइट पकौड़ी बेचि रहा तो कौनो डाइट लस्सी.. अउर जिम तो आजकाल अईस हाउस फुल चालि रहे मानो जईस हुवा कुम्भ का मेला चलि रहा.. खाना नाम की चीज जिंदगी से गायब हुई जाय रही.. अइसहे हमाय दोस्त आंय लखटकिया.. शिवाला मा रहत हैं.. साल भर से उनकी महेरिया के सर पे डाइटिंग केर भूत चड़ा है.. उनके घरे मा कभों उबला पालक बनि रहा तो कभों उबले करेले.. ई चक्कर मा लखटकिया पच्चीस किलो के अउर उनके पिताजी दस किलो के हुई गे..
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राजू श्रीवास्तव
मगर उनकी महेरिया का जरको फरक नाहि पड़ा. उई पहिले भी 165 किलो की रहीं अउर आजौ 165 किलो की आय.. वईसे ई मामले मा गांव की औरतें बढ़ियां आंय.. हमका याद आय नर्वल वाली हमरी मामी सुबह उठते ही आठ दस रोटी हुर देत रहीं.. फिर दुई किलो दूध अउर डेढ़ किलो सत्तू खींचे के बाद मुंह धोवत रहीं.. एके बावजूद उई एकदम फिट्टम फिट रहीं.. खैर अभीन कल हमका गोपाल टाकीज चौराहे पे मनोहर मिलि गे.. हम दुइनो वहीं नुक्कड़ पे चाय पिए लगे..
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Raju Srivastav
तो मनोहर हमसे कहे लाग कि अब हमका समझि मा आवा कि लोगे अमीर कइसे बनत हैं.. हम पूछा कइसे बनत हैं.. तो मनोहर कहिन काली चाय पी के.. हम कहा कि पगलैठ हौ का बे.. तो मनोहर कहिन काली चाय पी के दूध के पईसे बचाय के.. खैर दोस्तों शुक्रवार का बढ़िया फुरफुर वाली बारिस भयी.. चलो अच्छा भा.. आसमान मा उड़त धूल अउर परदूषण धुल के बहि गवा.. अब ई मान के चलौ कि हर दिन सर्दी बढ़त जाई.. आपन आपन रजाई गद्दा निकारि के धूप दिखाय देव..