दोस्तों ठंड केर मौसम सुरू हुई गवा है.. आज काल ठंड तो अइसे पड़ रही है जइसे कल ओका एग्जाम होय.. कल तो अईस कंकाला ठंड रही कि सोचा योगी जी से बात करि के दिसंबर महीना केर नाम जून करवाय दें.. मगर गुरु एक बात है..
ठंड के मौसम मा मजा बहुत आत है.. ठंड केर सबसे बड़ा फायदा ई होत है कि गरमी नाहीं लगत है.. वइसे ठंड केर मौसम का एक अउर फायदा ई है कि छत पे बइठ के धूप भी सेंक सकत हैं अउर आंखें भी.. अउर हमरा आज का विचार ई है कि इंसान का जितनी चादर होय उतना ही पैर पसारे का चाहि..
नाहीं तो ठंड लगत है भईया!!.. देखो भईया कहे वाली बात आय.. मगर केहू से कहेव नाहीं.. काहे से भगवान् केर घर मा देर होय मगर अंधेर नाहीं.. अब देखो गरमी केर मौसम मा हम भगवान से प्रार्थना किये रहन कि भगवान् हमरी छत पे रखी पानी केर टंकी का पानी उबल रहा है ओका ठंडा करि देव.. उई प्रार्थना भगवान अब जाय के सरदी में सुनिन हैं..। अइसे मा हमका दीवार फिलिम का मसहूर डायलाग तोड़े का मन होय रहा है कि आज हमरे पास बाल्टी है.. मग्घा है.. नल है.. बस नहाय केर हिम्मत नाहीं ना..
वइसे दोस्तों आज काल ठंड मा बॉडी स्प्रे अउर परफ्यूम केर बिक्री जोर पे है.. जो लोग नहात नाही हैं उनके लिए यही परफ्यूम स्प्रे तारणहार होय.. ऐसेहे रायपुरवा के हमरे मित्र है पंकज.. परसों हमका मिले तो जबरदस्त महकत रहे.. हम कहा यार जबर महेक रहे हौ गुरु.. चाय मा इतर डाल के पिए हौ का.. तो पंकज मुस्कीयावत रहे.. ऊ तो हमका पुत्तू बताये कि ई महिना भर से नहाय नाही हैं.. इतर परफ्यूम अपने उप्पर उडे़ल के घर से निकलत हैं..
वइसे भईया अब वो समय आय गवा है जब सुबह उठ के जिंदगी का सबसे बड़ा अउर मुस्किल फैसला करे का पड़त है.. कि आज नहावा जाय कि नाही !!.. वइसे ठंडी के मौसम मा नहावे से पहिले इन्सान ‘साइलेंट मोड’ पर होत है.. फिर नहात भये ‘लाउड मोड’ पे होत है.. अउर नहाय के बाद ‘वाईब्रेंट मोड’ पे.. कल हमहूं सोचा कि चलो आज नहावा जाय पर तबहीं टीवी पे न्यूज आवत रही.. ओमा बताईन कि आज ठंड से चार लोगन की मौत हुई गयी.. हम कहा भगाओ यार.. जान है तो जहान है भईया.. जिंदगी रही तो गरमी मा नहा लेबे..