पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने न सिर्फ देश की सुरक्षा को झकझोर कर रख दिया, बल्कि कई परिवारों की खुशियों को भी हमेशा के लिए छीन लिया। उन्हीं में से एक है कानपुर के हाथीपुर के रघुबीर नगर निवासी शुभम द्विवेदी का परिवार।
रघुवीर नगर की गलियों में गुरुवार सुबह का माहौल गम और गुस्से से भरा हुआ था। हर आंख नम थी, हर दिल बोझिल। शहर ने अपने बेटे शुभम को खोया था, जो गया तो कश्मीर घूमने था, लेकिन चार कंधों पर वापस आया। बुधवार रात करीब डेढ़ बजे शुभम का पार्थिव शरीर घर पहुंचा था, जिसके बाद पूरा हाथीपुर चीखों की गूंज से कांप सा उठा था। शीशे में बंद पार्थिव शरीर से लिपटकर परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल था।
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रोती बिलखती शुभम की पत्नी ऐशान्या
- फोटो : संवाद
गुरुवार सुबह तक हर किसी की आंखों में आंसू थे। रोते-बिलखते मां-बाप, बेसुध पत्नी और टूटे हुए भाई की चीखें घर की दीवारों से टकराकर बाहर तक गूंज रही थीं। शुभम की पत्नी ऐशान्या ने कभी सोचा भी नहीं था कि पति के साथ उसकी कश्मीर की यात्रा जीवन भर के पीड़ादायक सफर में बदल जाएगी। उनका सुहाग इतने कम समय में उजड़ जाएगा।
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शुभम द्विवेदी की फोटो देख पत्नी भावुक हो गई
- फोटो : संवाद
ऐशान्या ने पहनी शुभम की पसंदीदा शर्ट
वह देर तक पति के शव को देखती रहीं, मानो यकीन नहीं हो रहा हो। फिर अचानक कमरे में गई और शुभम की वही पसंदीदा शर्ट पहनकर बाहर आई, जिसे देखकर शुभम की आंखों में हमेशा चमक आ जाती थी। उस शर्ट में लिपटी ऐशान्या शुभम के शव से लिपटकर इस कदर रोईं कि हर किसी की आंखों से आंसू बह निकले। बीच-बीच में वह बेहोश भी होती रहीं। होश में आते ही फिर वह फफक-फफक रोने लगतीं।
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रोती बिलखती पत्नी ऐशान्या को संभालते परिजन
- फोटो : संवाद
ऐशान्या बोलीं, मम्मी मेरे सामने इनको गोली मारी, मुझे नहीं मारी
ऐशान्या ने रोते हुए कहा- मम्मी मेरे सामने इनको गोली मार दी। मुझे नहीं मारी। मुझे क्यों छोड़ दिया। वह मां और बहन भी शव से लिपटकर रोने लगीं। जो दिलासा देने पहुंचता, वह भी रोने लग रहा था। पूरी रात पत्नी ऐशान्या शव के पास बैठकर रोती रहीं। वह पति की तस्वीर पर हाथ फेरतीं, कभी उसे चूमतीं।
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शुभम द्विवेदी श्रद्धांजलि देने वालों की भीड़ लगी
- फोटो : संवाद
हर आंख को रुलाकर चला गया शुभम
जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों की गोली का शिकार हुए शुभम द्विवेदी का पार्थिव शरीर गुरुवार को पंचतत्व में विलीन हो गया। महाराजपुर स्थित गंगा किनारे ड्योढ़ी घाट पर हुए राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके चाचा मनोज द्विवेदी ने मुखाग्नि दी। इस मौके पर मौजूद सभी लोगों के आंखों में आंसू थे।