रात लगभग दो बजे कानपुर के हाथीपुर गांव में शुभम द्विवेदी के घर पर परिजन और गांव के सैकड़ों लोग उसके पार्थिव शरीर का इंतजार कर रहे थे। कुछ ही सेकंड बाद जैसे ही एंबुलेंस का सायरन सुनाई पड़ा तो परिजनों की करुण चीखें रात के सन्नाटे को चीरती चली गईं। जैसे ही एंबुलेंस घर के बाहर पहुंची तो चाचा मनोज कुमार द्विवेदी समेत अन्य परिजन दौड़ पड़े। शुभम के पिता संजय द्विवेदी जैसे ही उतरे तो हाय बउवा चला गया मनोज... कहकर बिलख पड़े और भाई मनोज के कंधे पर सिर रखकर रोने लगे।
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रोती-बिलखती शुभम की दादी
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भगवान ने सिर्फ दो महीने में ही बहू का सुहाग भी छीन लिया
यह दृश्य देख चाची अंजना और परिवार की अन्य महिलाएं फफक पड़ीं। आंखों में आंसू लेकर सभी एक-दूसरे को संभालते दिखीं। इसी बीच शुभम की दादी वहां पर आ गईं और तेज-तेज से चीखने लगीं। कहने लगीं कि कितनी खुशी से शुभम गया था घूमने और लौटा इस हालत में है। भगवान ने सिर्फ दो महीने में ही बहू का सुहाग भी छीन लिया। अब कौन मुझे अम्मा बुलाएगा। इसके बाद एंबुलेंस में रखे ताबूत को परिजनों ने उतारा तो हर आंख रोई।
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ताबूत से शव निकालकर डीप फ्रीजर में रखने की तैयारी करते परिजन
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मंत्रियों ने दी शुभम को श्रद्धांजलि
दादी, चाची समेत अन्य परिजन शव से लिपटकर चीखने लगे कि बउवा उठ जाओ। इसके बाद डीप फ्रीजर में शव रखा गया। अमौसी एयरपोर्ट से एंबुलेंस के साथ कैबिनेट मंत्री राकेश सचान, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय भी आए। दोनों मंत्रियों ने शुभम को श्रद्धांजलि दी और परिजनों को ढाढ़स बंधाया। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि कायराना हरकत करने वाले आतंकियों और उनको पनाह देने वाले पाकिस्तान को करारा जवाब दिया जाएगा।
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रोते-बिलखते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
ग्रीन कॉरिडोर बनाकर कानपुर भेजा गया शुभम का शव
इससे पहले शुभम का शव देर रात अमाैसी एयरपोर्ट से 14 गाड़ियों के काफिले के साथ एंबुलेंस से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर कानपुर भेजा गया। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने एयरपोर्ट पर पहुंचकर मृतकों को श्रद्धांजलि दी। साथ ही ब्रजेश पाठक टर्मिनल पर शुभम के घर वालों से मिले और उन्हें सांत्वना दी। इसके साथ ही उन्होंने आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात भी दोहराई। ब्रजेश पाठक ने कहा कि आतंकियों को ऐसा सबक सिखाएंगे कि उनकी पुश्तें याद रखेंगी। इस दुख की घड़ी में केंद्र और प्रदेश सरकार पीड़ितों के साथ खड़ी है।
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शुभम के पिता संजय को संभालते डिप्टी सीएम बृजेश पाठक
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रास्ता भटका गाड़ियों का काफिला
घर से कुछ दूर पहले मंत्रियों की गाड़ियों का काफिला दूसरी लेन में चला गया था। इस कारण एंबुलेंस तो घर पर पहले पहुंच गई पर अन्य वाहन कुछ देर बाद आ सके।