कानपुर के शहीद दीपक की मां की आंखों से आंसू नहीं रुक रहे थे तो पिता भी बेटे के गम में बेसुध थे। पूरा मोहल्ले में छाया मातम। देश के लिए शहीद हुए दीपक हर किसी की आंख नम कर गए। हो भी क्यों न। परिवार का इकलौता दीपक जो बुझ गया। दीपक का न कोई सगा भाई था और न ही कोई सगी बहन।
दीपक के पिता राम प्रकाश पांडेय दो भाई हैं। बड़े शिव प्रकाश पांडेय हैं। उनके छह बेटियां हैं। उन्होंने बताया कि दीपक इन सभी बहनों का दुलारा था। जब वह छुट्टी पर आता था तो इन बहनों के लिए कुछ न कुछ लेकर आता था। छह बहनें एकसाथ राखी बांधती थीं तो कलाई भर जाती थी। वह किसको राखी बांधेंगी।
पिता की नौकरी छुड़वा दी थी
दीपक के पिता बीमार रहते थे। परिजनों ने बताया कि कुछ समय पहले ही दीपक ने पिता के कूल्हे का ऑपरेशन कराया था। उनके पैर का भी ऑपरेशन हो चुका था। ऐसे में उनको नौकरी करने में काफी दिक्कत होती थी। ताऊ के मुताबिक हाल में दीपक ने पिता की नौकरी छुड़वा दी थी। कहा था, अब परिवार की जिम्मेदारी वह खुद उठाएगा।
ताऊ से मिली प्रेरणा
दीपक के ताऊ शिव प्रकाश एयरफोर्स से रिटायर हैं। परिजनों का कहना है कि दीपक ने ताऊ से ही एयरफोर्स में जाने की प्रेरणा पाकर नौकरी ज्वाइन की थी। वह शुरू से ही पढ़ाई में काफी तेज था।
मोहल्ले में छाया मातम
दीपक के शहीद होने की जानकारी के बाद भीड़ उसके घर पर इकट्ठा होती गई। हर कोई दीपक की बातें याद कर-कर रो रहा था। आसपास के लोगों ने बताया कि दीपक का व्यवहार बहुत अच्छा था।