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रैंक अच्छी, फिर भी नहीं ले रहे आईआईटी में प्रवेश, जेईई 2018 की रिपोर्ट से हुआ बड़ा खुलासा
Tue, 09 Apr 2019 12:33 PM IST
शिखा पांडेय
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 09 Apr 2019 12:33 PM IST
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एक तरफ आईआईटी जैसे संस्थान में एडमिशन पाने के लिए छात्र-छात्राएं दिन रात एक कर देते हैं, वहीं कई ऐसे भी युवा हैं जो जेईई में अच्छी रैंक मिलने के बावजूद एडमिशन नहीं ले रहे हैं। इनकी संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। इसका खुलासा जेईई 2018 की रिपोर्ट से हुआ है।
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रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल टॉप-100 में आने वाले चार, टॉप-300 के 28 और टॉप-500 के 51 छात्रों ने आईआईटी में एडमिशन नहीं लिया था। टॉप-1000 में ऐसे छात्रों की संख्या 131 थी जिन्होंने सफलता हासिल करने के बावजूद एडमिशन नहीं लिया। जबकि ये ऐसे छात्र थे जो अपने मनचाहे संस्थान में मनचाही ब्रांच हासिल कर सकते थे।
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ट्रिपल आईटी प्रयागराज के पूर्व निदेशक और आईआईटी कानपुर के सीनियर प्रोफेसर सोमनाथ बिस्वास कहते हैं कि विज्ञान वर्ग के ज्यादातर अव्वल छात्रों की पसंद आईआईटी से पहले आईआईएससी (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस) बंगलूरू होती है। छात्र पहली कोशिश आईआईएससी बंगलूरू में प्रवेश के लिए करते हैं, इसके बाद आईआईटी की ओर रुख करते हैं। इसके अलावा कुछ छात्र अंडरग्रेजुएट करने के लिए विदेश भी चले जाते हैं।
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आईआईटी की 118 सीटें रह गईं खाली
आईआईटी-एनआईटी में तमाम कोशिशों के बावजूद पिछली बार 118 सीटें खाली रह गई थीं। आईआईटी कानपुर की ओर से जारी जेईई 2018 की रिपोर्ट के अनुसार आईआईटी बीएचयू की 41, आईआईटी आईएसएम की 24, आईआईटी भुवनेश्वर की दो, गांधीनगर की चार, गुवाहाटी की दो, आईआईटी जोधपुर की 15, खड़गपुर की नौ, मद्रास की दो, रुड़की की छह, रोपर की तीन, त्रिपुति की एक, भिलाई की तीन, धरवाड़ की एक और जम्मू की छह सीटें खाली रह गई थीं।
आईआईटी-एनआईटी में तमाम कोशिशों के बावजूद पिछली बार 118 सीटें खाली रह गई थीं। आईआईटी कानपुर की ओर से जारी जेईई 2018 की रिपोर्ट के अनुसार आईआईटी बीएचयू की 41, आईआईटी आईएसएम की 24, आईआईटी भुवनेश्वर की दो, गांधीनगर की चार, गुवाहाटी की दो, आईआईटी जोधपुर की 15, खड़गपुर की नौ, मद्रास की दो, रुड़की की छह, रोपर की तीन, त्रिपुति की एक, भिलाई की तीन, धरवाड़ की एक और जम्मू की छह सीटें खाली रह गई थीं।
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आईआईटी बीएचयू में 14 प्रतिशत से कम लड़कियों की संख्या
केंद्र सरकार ने आईआईटी संस्थानों में लड़कियों की संख्या बढ़ाने के लिए 2018 में सुपरन्यूमरेरी कोटे के तहत सीटें बढ़ा दी थीं। इससे आईआईटी बीएचयू छोड़कर देशभर के सभी आईआईटी संस्थानों में लड़कियों की संख्या लगभग प्रत्येक विभाग में 14 प्रतिशत या इससे ऊपर हो गई। आईआईटी बीएचयू में लड़कियों की संख्या 13.85 ही है। इस बार सुपरन्यूमरेरी का कोटा 14 से बढ़ाकर 17 किया जाना है।
केंद्र सरकार ने आईआईटी संस्थानों में लड़कियों की संख्या बढ़ाने के लिए 2018 में सुपरन्यूमरेरी कोटे के तहत सीटें बढ़ा दी थीं। इससे आईआईटी बीएचयू छोड़कर देशभर के सभी आईआईटी संस्थानों में लड़कियों की संख्या लगभग प्रत्येक विभाग में 14 प्रतिशत या इससे ऊपर हो गई। आईआईटी बीएचयू में लड़कियों की संख्या 13.85 ही है। इस बार सुपरन्यूमरेरी का कोटा 14 से बढ़ाकर 17 किया जाना है।