नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने गुरुवार शाम सात बजे पद और गोपनीयता की शपथ ली। बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दूसरा कार्यकाल है। पार्टी की प्रचंड जीत के बाद नरेंद्र मोदी का यह शपथ ग्रहण कई मायनों में बेहद खास रहा। पिछले शपथ ग्रहण समारोह की तुलना में इस बार की तैयारियों ने शपथ समारोह को भव्य और यादगार बनाया। जनता द्वारा चुने गए लोकसभा प्रतिनिधि जिनमें भाजपा के साथ ही कई अन्य दलों के नेता भी इसमें शामिल हुए।
यह शपथ ग्रहण कानपुर और कानपुर देहात के लिए बेहद खास रहा। इस बार नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने जब पद और गोपनीयता की शपथ ली तो उनके सामने राष्ट्रपति के रूप में परौंख का बेटा था। यह कानपुर और कानपुर देहात के लिए गर्व की बात थी।
आपको बता दें कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का जन्म कानपुर देहात की डेरापुर तहसील के गांव परौंख में 1945 में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा संदलपुर ब्लाक के ग्राम खानपुर परिषदीय प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय हुई। कानपुर नगर के बीएनएसडी इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद डीएवी कॉलेज से बी-कॉम व डीएवी लॉ कालेज से विधि स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दिल्ली में रहकर तीसरे प्रयास में आईएएस की परीक्षा पास की, लेकिन मुख्य सेवा के बजाय एलायड सेवा में चयन होने पर नौकरी ठुकरा दी।
जून 1975 में आपातकाल के बाद उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में वकालत से करियर की शुरुआत की। वर्ष 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद रामनाथ कोविंद तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के निजी सचिव बने। इसके बाद वे भाजपा नेतृत्व के संपर्क में आए। कोविंद को पार्टी ने वर्ष 1990 में घाटमपुर लोकसभा सीट से टिकट दिया लेकिन वह चुनाव हार गए।
वर्ष 1993 व 1999 में पार्टी ने उन्हें प्रदेश से दो बार राज्यसभा में भेजा। कोविंद अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रवक्ता भी रहे। घाटमपुर से चुनाव लड़ने के बाद कोविंद लगातार क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं से संपर्क में रहे।