फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

आपको जरूर जानना चाहिए 'पीएसी जवानों के मूछ भत्ते' के बारे में, पहली बार इन्हें मिला था लाभ

Sat, 19 Jan 2019 08:43 AM IST
प्रशांत कुमार यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रशांत कुमार Updated Sat, 19 Jan 2019 08:43 AM IST
विज्ञापन
mustache allowance to PAC soldiers increased
डेमो पिक
कानपुरः एक तरफ पीएसी जवानों के मूंछ भत्ते में बढ़ोतरी की गई है, वहीं शहर में हालत यह है कि अधिकांश जवानों को इस भत्ते के बारे में अभी तक पता ही नहीं था। साथ ही वह मूंछ रखने को तरजीह भी नहीं देते। जो जवान मूंछें रखते भी हैं, तो वह भी छोटी। बड़ी मूंछ रखने का शौक अब पीएसी जवानों को नहीं है। कभी शान की निशानी बड़ी मूंछ की पूछ नहीं हो रही है।  
mustache allowance to PAC soldiers increased
डेमो पिक
शहर में 37वीं बटालियन पीएसी का मुख्यालय है। उपसेनानायक असीम चौधरी ने बताया कि यहां पर छह कंपनियां हैं। प्रत्येक कंपनी में 130 से 135 जवान हैं। इस तरह से यहां पर आठ सौ से अधिक पीएसी जवान तैनात हैं। जब अमर उजाला की टीम ने पड़ताल की तो सभी पीएसी कंपनियों केकमांडर से बातचीत की। उसमें पता चला कि एक भी जवान की बड़ी मूंछें नहीं हैं। वहीं, बहुत से ऐसे जवान भी हैं, जो मूंछ भत्ते के बारे जानते तक नहीं हैं।

 
mustache allowance to PAC soldiers increased
डेमो पिक
एकाउंटेंट पवन गुप्ता पिछले दो वर्षों से पीएसी मुख्यालय का कामदेख रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान उन्होंने एक भी जवान मूंछ भत्ता नहीं दिया है। पवन के मुताबिक कभी किसी जवान ने इस भत्ते की मांग ही नहीं की। वहीं पीएसी के आलाअफसर के मुताबिक पिछले एक दशक से यहां पर किसी को भी मूंछ भत्ता नहीं दिया गया है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन
mustache allowance to PAC soldiers increased
डेमो पिक
पीएसी जवान बड़ी मूंछ रखकर गर्व महसूस करते थे। जुलाई 2006 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने पीएसी केजवानों को मूंछ भत्ता देने की शुरुआत की थी। उस समय से यह राशि पचास रुपये थी। बुधवार को इसे पांच गुना बढ़ाकर 250 रुपए प्रतिमाह कर दिया गया है। 

 
विज्ञापन
mustache allowance to PAC soldiers increased
डेमो पिक
ब्रिटिश हुकूमत के दौरान सिपाही सूरज सिंह को मूंछ भत्ता दिया गया था। सूरज सिंह 1989 में सेवानिवृत्त हुए थे। सन् 2006 में सबसे पहले 35वीं बटालियन के दो जवानों मंगला प्रसाद पाल और रामखेलावन को 50-50 रुपये प्रतिमाह मूंछ भत्ता दिया गया था। इसके कुछ दिन बाद आजमगढ़ निवासी शेषनाथ सिंह को भी मूंछ भत्ता दिया गया था।

 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed