समाजवादी पार्टी के मार्गदर्शक मुलायम सिंह यादव को किसी समय ‘मुलायम’ नाम वालों ने खूब परेशान किया था। ये बात उन दिनों की है जब मुलायम सिंह यादव साल 1989 में चुनाव लड़ रहे थे।
मुलायम सिंह यादव को ‘मुलायम’ ने खूब किया परेशान, जानें कौन हैं ये ‘मुलायम’...
पहली बार मुलायम को अपनी वास्तविक मतदाता पहचान स्थापित करने के लिए 1989 में पिता के नाम सुधर सिंह का सहारा लेना पड़ा। इटावा की जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र से उन्हीं की नामराशि वाले व्यक्ति ने उन्हें चुनौती दी । यही हालात साल 1991 और साल 1993 के चुनाव में भी रहे। जिससे मुलायम सिंह यादव खूब परेशान हुए।
मुलायम सिंह यादव को ‘मुलायम’ ने खूब किया परेशान, जानें कौन हैं ये ‘मुलायम’...
1967 में पहली बार विधायक बनने के बाद मुलायम कुल आठ बार विधायक रह चुके हैं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार 1989 में जनता दल ने मुलायम सिंह यादव पुत्र सुधर सिंह को चुनाव मैदान में उतारा। उनके मुकाबले एक दूसरे मुलायम सिंह यादव नाम के निर्दलीय प्रत्याशी खड़े हो गए इस निर्दलीय मुलायम सिंह यादव के पिता का नाम पत्तीराम था।
मुलायम सिंह यादव को ‘मुलायम’ ने खूब किया परेशान, जानें कौन हैं ये ‘मुलायम’...
उस समय मुलायम को 65 597 वोट मिले जबकि उनके नामराशि वाले पत्तीराम के बेटे मुलायम को केवल 1032 मत मिले। यही हालात साल 1991 में भी थे जब जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ कर मुलायम जसवंतनगर सीट से जीते। उन्हें 47765 वोट मिले जबकि उनके नामराशि वाले मुलायम को केवल 328 वोट मिले।
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इसी 1991 के चुनाव में भी एक अन्य मुलायम सिंह नजर आये वो भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में बरौली विधानसभा सीट से लड़े ये नये मुलायम 218 मत ही हासिल कर पाये थे। मुलायम सिंह यादव साल 1993 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की तीन सीटों जसवंत नगर (इटावा, शिकोहाबाद (फिरोजाबाद) और निधौली कलां (एटा) से सपा के टिकट पर चुनाव लड़े तीनों सीटों पर जीत गए।