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कानपुर: रद्द फर्मों से करोड़ों की आईटीसी लेने का भंडाफोड़, 20 लाख से ज्यादा जमा कराए
Thu, 08 Oct 2026 08:07 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Thu, 08 Oct 2026 08:07 PM IST
सार
जाजमऊ की चमड़ा शोधन और केमिकल ट्रेडिंग से जुड़ी फर्म की जांच में खुलासा हुआ। दो साल पहले 40 लाख रुपये टर्नओवर था। अब सात करोड़ हो गया। जबकि टैक्स शून्य दिया।
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एसजीएसटी टीम ने की कार्रवाई
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राज्य कर विभाग (एसजीएसटी) ने बृहस्पतिवार को जाजमऊ में बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के बड़े खेल का पर्दाफाश किया है। विभाग के अफसरों ने चमड़ा शोधन और केमिकल ट्रेडिंग से जुड़ी फर्म सैडल हैवन फर्म पर 1.53 करोड़ रुपये की फर्जी आईटीसी हड़पने का खुलासा किया है। फर्म संचालक ने 11 रद्द फर्मों से आईटीसी का भुगतान लिया। दो साल पहले फर्म का टर्नओवर 40 लाख था। जो अब बढ़कर 7 करोड़ हो गया। जबकि इस दौरान टैक्स शून्य रहा। जांच के बाद फर्म संचालक से 20.96 लाख रुपये जमा कराए।
अपर आयुक्त कुमार आनंद और संयुक्त आयुक्त सुशील कुमार गौतम के निर्देश में यह कार्रवाई की गई। विभाग पिछले कई महीने से फर्मों का डाटा विश्लेषण कर रहा था। फर्म द्वारा घोषित मुख्य व्यापार स्थल नसीम रेजीडेंसी तिलक नगर कानपुर एक आवासीय परिसर निकला। फर्म स्वामी फहद सलीम ने फरवरी 2024 से मार्च 2025 तक इसे रहने के उद्देश्य से इस्तेमाल किया था। वर्तमान में उस स्थल पर कोई व्यापारिक गतिविधि नहीं मिली।
फर्म द्वारा घोषित अतिरिक्त व्यापार स्थल संजय नगर वाजिदपुर लेन पर भी व्यापार से संबंधित कोई दस्तावेज मौके पर नहीं मिला। संजय नगर वाजिदपुर जाजमऊ में संचालित सैडल हैवन की जांच में पाया गया कि उसने 11 रद्द फर्मों से फर्जी आईटीसी का इस्तेमाल किया। इस आईटीसी का उपयोग अपनी करदेयता को समायोजित करने के लिए किया गया था। फर्म का टर्नओवर वर्ष 2024-25 में 40 लाख रुपये से बढ़कर वर्ष 2026-27 में जांच की तिथि तक लगभग 7 करोड़ रुपये हो गया था। इसके बावजूद, फर्म की नकद करदेयता शून्य रही। जांच के दौरान मौके पर 20.96 लाख रुपये का चालान भरवाया गया। विभाग के अफसरों ने इस धोखाधड़ी में शामिल कई अन्य फर्मों और संदिग्ध व्यक्तियों को भी चिह्नित किया है। इन सभी पर जल्द ही सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच कार्रवाई में उप आयुक्त संतोष कुमार सिंह, सहायक आयुक्त सुभाष चंद्र, राज्य कर अधिकारी रमेश कुमार तिवारी और शुचि राय शामिल रहीं।
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अपर आयुक्त कुमार आनंद और संयुक्त आयुक्त सुशील कुमार गौतम के निर्देश में यह कार्रवाई की गई। विभाग पिछले कई महीने से फर्मों का डाटा विश्लेषण कर रहा था। फर्म द्वारा घोषित मुख्य व्यापार स्थल नसीम रेजीडेंसी तिलक नगर कानपुर एक आवासीय परिसर निकला। फर्म स्वामी फहद सलीम ने फरवरी 2024 से मार्च 2025 तक इसे रहने के उद्देश्य से इस्तेमाल किया था। वर्तमान में उस स्थल पर कोई व्यापारिक गतिविधि नहीं मिली।
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फर्म द्वारा घोषित अतिरिक्त व्यापार स्थल संजय नगर वाजिदपुर लेन पर भी व्यापार से संबंधित कोई दस्तावेज मौके पर नहीं मिला। संजय नगर वाजिदपुर जाजमऊ में संचालित सैडल हैवन की जांच में पाया गया कि उसने 11 रद्द फर्मों से फर्जी आईटीसी का इस्तेमाल किया। इस आईटीसी का उपयोग अपनी करदेयता को समायोजित करने के लिए किया गया था। फर्म का टर्नओवर वर्ष 2024-25 में 40 लाख रुपये से बढ़कर वर्ष 2026-27 में जांच की तिथि तक लगभग 7 करोड़ रुपये हो गया था। इसके बावजूद, फर्म की नकद करदेयता शून्य रही। जांच के दौरान मौके पर 20.96 लाख रुपये का चालान भरवाया गया। विभाग के अफसरों ने इस धोखाधड़ी में शामिल कई अन्य फर्मों और संदिग्ध व्यक्तियों को भी चिह्नित किया है। इन सभी पर जल्द ही सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच कार्रवाई में उप आयुक्त संतोष कुमार सिंह, सहायक आयुक्त सुभाष चंद्र, राज्य कर अधिकारी रमेश कुमार तिवारी और शुचि राय शामिल रहीं।
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