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Mulayam: एक ही गांव से UP को चार बार मुख्यमंत्री देने में भी नेताजी का योगदान, अखिलेश को CM बनाकर रचा इतिहास
Tue, 11 Oct 2022 08:35 AM IST
शाहरुख खान
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 11 Oct 2022 08:35 AM IST
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मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव।(फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
कुश्ती के अखाड़े से निकले सियासी पहलवान मुलायम सिंह के पास हर मौके के लिए नया दांव होता था। राजनीति में युवा नेता के पदार्पण के बहाने विरासत की सियासत बेटे को थमाना भी इन्हीं दांव में से एक है। अखिलेश को मुख्यमंत्री बनवाकर उन्होंने अपनी जन्मभूमि इटावा का नाम इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज करवा दिया। अखिलेश के मुख्यमंत्री बनते ही इटावा पहला जिला बन गया था, जिसने ऐसे दो मुख्यमंत्री दिए, जिनका जन्म एक ही गांव में हुआ। दोनों मुख्यमंत्री एक ही पार्टी के हैं। खास बात ये भी है कि उसी गांव ने प्रदेश को चार बार मुख्यमंत्री दिए। विकास के नाम पर देश में अलग पहचान रखने वाले सैफई को कौन नहीं जानता? प्रदेश के 21वें, 23वें और 31वें मुख्यमंत्री का रुतबा हासिल करने वाले मुलायम सिंह का जन्म इटावा के सैफई गांव में ही हुआ।
मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश के 33वें मुख्यमंत्री बने अखिलेश यादव का जन्म स्थान भी सैफई है। हालांकि सैफई अब तहसील है। अखिलेश के मुख्यमंत्री बनने से पहले एक ही जिले से ज्यादा मुख्यमंत्री देने का श्रेय अलीगढ़ के नाम था।
मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश के चौथे, छठवें और आठवें मुख्यमंत्री चंद्रभान गुप्ता, 22वें और 26वें मुख्यमंत्री कल्याण सिंह अलीगढ़ से ही थे। मगर इनके गांव और तहसील अलग अलग हैं। इसी तरह बनारस को तीन बार मुख्यमंत्री देने का तमगा हासिल है।
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मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश के दूसरे मुख्यमंत्री डॉ. संपूर्णानंद, 10वें मुख्यमंत्री त्रिभुवन नारायण सिंह और 11वें मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी का जन्म बनारस में हुआ। इनके जन्म स्थान अलग अलग रहे। प्रदेश की सियासत में जिले का नाम दर्ज करवाने के लिए इटावा नेता जी का हमेशा ऋणी रहेगा।
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मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
चंबल के बीहड़ से डकैतों का कराया था सफाया
गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंजने वाले चंबल के बीहड़ी क्षेत्र से खूंखार डकैतों का सफाया भी मुलायम की अहम उपलब्धि रही। कई दशकों तक बागियों की शरणस्थली रहे बीहड़ में वर्ष 2003 से 2007 तक नया सवेरा हुआ।
गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंजने वाले चंबल के बीहड़ी क्षेत्र से खूंखार डकैतों का सफाया भी मुलायम की अहम उपलब्धि रही। कई दशकों तक बागियों की शरणस्थली रहे बीहड़ में वर्ष 2003 से 2007 तक नया सवेरा हुआ।