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लाजवाब स्वाद से देश-विदेश में मशहूर 'फतेहपुर का मोहन पेड़ा', ऑटोमेटिक मशीन से हो रहा तैयार

Fri, 29 Dec 2017 09:25 AM IST
सीपी सिंह, अमर उजाला, फतेहपुर
सीपी सिंह, अमर उजाला, फतेहपुर Updated Fri, 29 Dec 2017 09:25 AM IST
सार

- दस पैसे से शुरू हुआ काम आज दे रहा लाखों का टर्नओवर 
- दिल्ली, लखनऊ प्रदर्शनी में स्वादिष्ट पेड़ा बढ़ा चुका जिले का मान
- इंटरनेट से मिलते आर्डर, कोरियर से करते हैं सप्लाई
- पिता से विरासत में मिले व्यवसाय को बेटे ने संभाला

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mohan peda speciality of fatehpur
मोहन पेड़ा
मुश्किलें हैं तो क्या, हौसले भी तो हैं, हौसले हैं तो विश्वास है और विश्वास है तो जीत होगी ही...। कुछ इन्हीं इरादों के बीच 52 साल पहले शुरू हुआ मोहन पेड़ा का व्यवसाय अब किसी नाम का मोहताज नहीं। दोआबा की धरती पर बना यह मोहन पेड़ा अपने स्वाद और आकार के लिए मशहूर है। यह अब सिर्फ देश ही नहीं विदेशी दिलों में भी राज कर रहा है। 

 

मोहनपुरम मोहल्ले में श्रीमोहन पेड़ा मिष्ठान भंडार

mohan peda speciality of fatehpur
मोहन पेड़ा
फतेहपुर जनपद में मलवां के मोहनपुरम मोहल्ले में श्रीमोहन पेड़ा मिष्ठान भंडार है। दस पैसे से शुरू हुआ यह व्यवसाय आज लाखों का टर्न ओवर दे रहा है। मोहन पेड़ा के स्वाद के दीवाने दिल्ली, मुंबई, अमेरिका, सऊदी अरब, कुबैत के लोग भी हैं। लोग विदेशों में रहने वाले अपनों को मोहन पेड़ा भेजते रहते हैं।

 

जिले का मान बढ़ा रहा मोहन पेड़ा

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मोहन पेड़ा
दिल्ली, लखनऊ में लगने वाली प्रदर्शनी में मोहन पेड़ा अपनी उपस्थिति दर्ज करवा जिले का मान बढ़ा चुका है। वेबसाइट की ट्रेड मार्क में इसे फोर स्टार रेटिंग भी मिल चुकी है। हाथोहाथ तो यह बिकता ही है। ऑनलाइन आर्डर पर कोरियर से ग्राहकों तक भेजा जाता है। पिता स्व. मोहन गुप्ता से विरासत में मिले व्यवसाय को उनके बेटे नरेश गुप्ता मोहन ने संभाला और आगे बढ़ाया। नरेश गुप्ता ने बताया कि प्रतिदिन 40 से 50 किलो पेड़ा बिकता है। 
 
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ये मिठाइयां भी हैं मशहूर

mohan peda speciality of fatehpur
मोहन पेड़ा
फतेहपुर के श्रीमोहन पेड़ा मिष्ठान भंडार में पेड़े की मिठास तो दिलों को छू चुकी है। यहां मोहन मावा पिन्नी, मोहन बेसन के लड्डू, मोहन बालूशाही, मोहन मूंगदाल, मोहन दूध की बर्फी की मिठाइयां भी ग्राहक खूब पसंद कर रहे हैं। 
 
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महात्मा गांधी से मिली प्रेरणा

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मोहन पेड़ा
श्रीमोहन पेड़ा प्रतिष्ठान के मालिक नरेश गुप्ता मोहन कहते हैं कि वे महात्मा गांधी को अपना प्रेरणास्रोत मानते हैं। इसीलिए अच्छा सोचो, अच्छा बोलो और अच्छा करो के सिद्धांत पर चलते हैं। बताया कि श्रीमोहन शिशु मंदिर मलवां में संचालित है, जिसमें गरीब बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दी जाती है। 
 
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