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अवैध असलहा में घिरे मंत्रीजी: खतरे में थी राकेश सचान की विधायकी, जानें कौन से एक्ट की वजह से बाल-बाल बची
Tue, 09 Aug 2022 10:05 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 09 Aug 2022 10:05 AM IST
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मंत्री राकेश सचान
- फोटो : अमर उजाला
दूसरे का लाइसेंसी असलहा अपने पास रखने के मामले में आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाए गए प्रदेश के लघु सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान को अपर मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट तृतीय आलोक यादव ने एक साल कैद और 1500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर एक माह की कैद और भुगतने का आदेश भी दिया। हालांकि राकेश सचान के प्रार्थना पत्र पर उन्हें फैसले के खिलाफ 15 दिन में सेशन कोर्ट में अपील दायर करने के लिए 20-20 हजार की दो जमानतों और निजी मुचलके पर उन्हें रिहा भी कर दिया गया। नौबस्ता में 13 अगस्त 1991 को तत्कालीन एसओ बृजमोहन उदेनिया ने राकेश सचान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि उनके पास से राइफल बरामद हुई, जिसका लाइसेंस नहीं दिखा सके। इसी मामले में शनिवार को कोर्ट ने अभियुक्त राकेश सचान को दोषी करार दे दिया था।
कैबिनेट मंत्री राकेश सचान अपने अधिवक्ता के चैंबर में
- फोटो : अमर उजाला
पुराने एक्ट का मिला लाभ, नहीं तो फंस जाती विधायकी
राकेश सचान के खिलाफ मुकदमा वर्ष 1991 में दर्ज हुआ था। उस समय जो आर्म्स एक्ट लागू था, उसी के तहत कोर्ट ने धारा 25 में न्यूनतम एक साल की सजा सुनाई। वर्ष 2019 में आर्म्स एक्ट संशोधन अधिनियम पारित हो गया था। अगर मामले की सुनवाई इस एक्ट के तहत होती तो धारा 25 में न्यूनतम तीन साल की सजा का प्रावधान है।
राकेश सचान के खिलाफ मुकदमा वर्ष 1991 में दर्ज हुआ था। उस समय जो आर्म्स एक्ट लागू था, उसी के तहत कोर्ट ने धारा 25 में न्यूनतम एक साल की सजा सुनाई। वर्ष 2019 में आर्म्स एक्ट संशोधन अधिनियम पारित हो गया था। अगर मामले की सुनवाई इस एक्ट के तहत होती तो धारा 25 में न्यूनतम तीन साल की सजा का प्रावधान है।
कैबिनेट मंत्री राकेश सचान अधिवक्ता के चैंबर में
- फोटो : अमर उजाला
जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत दो साल से ऊपर सजा होने पर विधानसभा की सदस्यता जा सकती है। एक साल की सजा होने के कारण अब राकेश सचान की विधायकी तो नहीं जाएगी लेकिन मंत्री पद पर फैसला मुख्यमंत्री को करना है। मुख्यमंत्री के सामने अब कोई कानूनी बाध्यता नहीं है, लेकिन सरकार की छवि को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री क्या फैसला लेते हैं यह देखने वाला होगा।
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राकेश सचान ने किया समर्पण
- फोटो : अमर उजाला
अभियोजन की ओर से पेश किए गए चार गवाह
अभियोजन अधिकारी रिचा गुप्ता ने बताया कि मुकदमे में अभियोजन की ओर से चार गवाह पेश किए गए थे। इनमें वादी मुकदमा सीबीसीआईडी के निरीक्षक बृजमोहन उदेनिया की गवाही मुख्य थी। इसके अलावा सिपाही रामराज गुप्ता, इंद्र बहादुर सिंह व उपनिरीक्षक जयपाल सिंह को गवाह के रूप में पेश किया गया था। सभी ने अभियोजन की घटना का समर्थन किया था जिसके आधार पर राकेश सचान को सजा सुनाई गई।
अभियोजन अधिकारी रिचा गुप्ता ने बताया कि मुकदमे में अभियोजन की ओर से चार गवाह पेश किए गए थे। इनमें वादी मुकदमा सीबीसीआईडी के निरीक्षक बृजमोहन उदेनिया की गवाही मुख्य थी। इसके अलावा सिपाही रामराज गुप्ता, इंद्र बहादुर सिंह व उपनिरीक्षक जयपाल सिंह को गवाह के रूप में पेश किया गया था। सभी ने अभियोजन की घटना का समर्थन किया था जिसके आधार पर राकेश सचान को सजा सुनाई गई।
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मंत्री राकेश सचान
- फोटो : सोशल मीडिया
दो आरोपियों के मुकदमे हो चुके निस्तारित
कर्रही चौराहे पर 13 अगस्त 1991 की रात किदवई नगर निवासी राकेश सचान, घाटमपुर निवासी दिनेश चंद्र सचान और ड्राइवर घाटमपुर निवासी विनोद वर्मा को गिरफ्तार किया गया था। राकेश के पास से एक राइफल और 9 कारतूस, दिनेश के पास से एक एसबीबीएल गन बरामद हुई थी। दोनों ही असलहों का लाइसेंस नहीं दिखा सके थे। ड्राइवर भी गाड़ी के कागजात और ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिखा सका था।
कर्रही चौराहे पर 13 अगस्त 1991 की रात किदवई नगर निवासी राकेश सचान, घाटमपुर निवासी दिनेश चंद्र सचान और ड्राइवर घाटमपुर निवासी विनोद वर्मा को गिरफ्तार किया गया था। राकेश के पास से एक राइफल और 9 कारतूस, दिनेश के पास से एक एसबीबीएल गन बरामद हुई थी। दोनों ही असलहों का लाइसेंस नहीं दिखा सके थे। ड्राइवर भी गाड़ी के कागजात और ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिखा सका था।