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माहे सिद्दीकी किताब से बताएंगी 'चित्रकूट का इतिहास', इससे पहले उर्दू में लिख चुकी हैं रामकथा
ऐश्वर्या द्विवेदी, अमर उजाला, कानपुर
Updated Thu, 05 Jul 2018 03:44 PM IST
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माहे सिद्दीकी
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उर्दू में रामकथा का अनुवाद कर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करने वालीं माहे तलत सिद्दीकी अब चित्रकूट के इतिहास को अपने नजरिये से लिखेंगी। इसके लिए वह जल्द ही चित्रकूट जाकर वहां की खासियतों एवं संस्कृति का अध्ययन करेंगी। माहे कहती हैं कि उनका उद्देश्य अपनी कलम के जरिये मानवता का संदेश देना है।
माहे सिद्दीकी
कानपुर की माहे कहती हैं कि चित्रकूट का अपना एक खास इतिहास है जो काफी रोचक है। मैंने इसके बारे में बहुत कुछ सुन व पढ़ रखा है। जानना चाहती हूं कि आखिर इस जगह के बारे में कवि अब्दुर्रहीम खानखाना को क्या पसंद आ गया था कि वे वहीं रुक गए थे। वहीं यहां पर एक रामायण मेला लगता है। जिसमें एक जमाने पूर्व गवर्नर अकबर अली पहुंचे थे।
माहे सिद्दीकी
उनका इस जगह पर आकर बस एक ही बात कहना था कि वह खुशकिस्मत है जो इस जगह पर हैं। चित्रकूट के बारे में कही गईं ये बातें मेरा कौतूहल बढ़ा देती हैं कि आखिर क्या खास है इस जगह के बारे में। ये सब कुछ जानकर मैं चित्रकूट के बारे में एक किताब हिंदी में लिखूंगी।
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माहे सिद्दीकी
साहित्य और भाषा किसी की जागीर नहीं
माहे का कहना है कि साहित्य और भाषा किसी की जागीर नहीं है। कोई कुछ भी पढ़ और लिख सकता है। कहती हैं कि उनका उद्देश्य है कि लोग एक-दूसरे के धर्म और ग्रंथ के बारे में जाने।
माहे का कहना है कि साहित्य और भाषा किसी की जागीर नहीं है। कोई कुछ भी पढ़ और लिख सकता है। कहती हैं कि उनका उद्देश्य है कि लोग एक-दूसरे के धर्म और ग्रंथ के बारे में जाने।
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माहे सिद्दीकी
माहे के बारे में
पेशे से लेखिका माहे ने हिंदी से पीएचडी की है। वह चमनगंज स्थित जुबली गर्ल्स इंटर कॉलेज में हिंदी पढ़ाती हैं। इनकी मां डॉ. महलका एजाज शहर के ही हलीम मुस्लिम डिग्री कॉलेज में उर्दू विभाग की एचओडी रही हैं, जबकि पिता एजाज अहमद लेबर ऑफिस में अधिकारी थे। माहे तलत अपनी मां से प्रेरणा लेकर लेखिका बनीं। हिंदू और उर्दू से गहरे लगाव ने उन्हें अच्छा लेखक बनने में मदद की।
पेशे से लेखिका माहे ने हिंदी से पीएचडी की है। वह चमनगंज स्थित जुबली गर्ल्स इंटर कॉलेज में हिंदी पढ़ाती हैं। इनकी मां डॉ. महलका एजाज शहर के ही हलीम मुस्लिम डिग्री कॉलेज में उर्दू विभाग की एचओडी रही हैं, जबकि पिता एजाज अहमद लेबर ऑफिस में अधिकारी थे। माहे तलत अपनी मां से प्रेरणा लेकर लेखिका बनीं। हिंदू और उर्दू से गहरे लगाव ने उन्हें अच्छा लेखक बनने में मदद की।