प्यास से व्याकुल ये बेजुबान आने वाले जल संकट की कहानी बयां कर रहे हैं। गिरता जल स्तर और पानी की अकूत बर्बादी आने वाले समय इससे भी भयावह तस्वीरें दिखा सकती है। इसके लिए एक दिन के अभियान से कोई बदलाव होने वाला नहीं है। अभियान को रोजमर्रा की जिंदगी में उतार कर ही जल संकट जैसी भयंकर आपदा से बचा जा सकता है। तिनके के साथ प्यास बुझाता ये कौआ अपने आप में एक बड़ा संदेश दे रहा है। बेजुबानों के मर्म को अभी भी समझकर भविष्य के बड़े संकट से निजात मिल सकती है।
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गर्मी से परेशान गाय
- फोटो : ओ. पी. वाधवानी
टोटी से पानी पीती ये गाय किसी की भी आत्मा को झकझोर सकती है। गर्मी बढ़ते ही जल संकट का प्रकोप झेल रहे इंसान कहीं न कहीं से पानी की व्यवस्था तो कर लेते हैं लेकिन ये बेजुबान प्यास से इधर-उधर भटकते रहते हैं। कई बार तो ऐसे मामले भी सामने आ जाते हैं जब पानी की तलाश में ये जानवर काल के गाल में समा जाते हैं।
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तिनके से पानी पीता कौआ
- फोटो : ओ. पी. वाधवानी
कहते हैं डूबते को एक तिनके का सहारा काफी...लेेकिन यही तिनका जब एक पक्षी के लिए जीने का सहारा बने तो कई सवाल भी जन्म ले लेते हैं।
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तिनके से घड़े में भारे पानी को निकालता कौआ
- फोटो : ओ. पी. वाधवानी
गायब होते कुएं और तालाब इंसान को कठघरे में खड़ा कर देते हैं।
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गाय का दूध पीता बंदर
- फोटो : ओ. पी. वाधवानी
ये मार्मिक तस्वीर निश्छल ममता का नायाब उदाहरण है। जिसमें गाय का दूध पीकर ये बंदर प्यास बुझा रहा है। खग जाने खग ही की भाषा...की कहावत को ये बेजुबान बखूबी बयां कर रहे हैं। साथ ही इंसानी फितरत को भी ये तस्वीर अच्छी तरह से दर्शा रही है। अपने स्वार्थ के कारण तालाबों और कुओं की बलि देने वाले लोगों के लिए ये तस्वीर एक आइना है। जिसमें वह खुद को देखकर ये आंकलन कर सकते हैं कि आने वाले समय में पानी का संकट और कितना गहरा हो सकता है।