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लॉकडाउन: घर पहुंचने के लिए पति-पत्नी 600 किमी पैदल चले, बोले रुकते तो कोरोना नहीं भूख से मरते
Wed, 01 Apr 2020 10:19 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Wed, 01 Apr 2020 10:19 PM IST
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जेब में नहीं थे पैसे तो किया 600 किमी का सफर
- फोटो : amar ujala
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कोराना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए पूरे देश में लॉकडाउन की घाेषणा के बाद लोग अपने घरों की ओर भाग रहे हैं। ऐसे में घर वापसी के लिए रुपये न होने पर एक मजदूर परिवार गुरुग्राम से पैदल ही निकल पड़ा। छह सौ किमी से अधिक का सफर तय करने पर इन लोगों के पैरों में छाले पड़ गए। परिवार की महिलाओं के थकने पर उन्हें हाथ ठेला में बैठाकर खींचते थे। मासूम बच्चों व महिलाओं सहित बुधवार को कस्बा पहुंचे इस परिवार ने जीआरवी कालेज में स्वास्थ्य परीक्षण कराया।
600 किमी का सफर करने के बाद गांव पहुंचे पति पत्नी
- फोटो : amar ujala
चिल्ली गांव निवासी छोटेलाल पुत्र किशना ने बताया गरीबी व भुखमरी से तंग आकर परिवार सहित गुरुग्राम में मजदूरी करने गया था। लॉकडाउन होने पर मजदूरी मिलना बंद हो गई। रोज कमाने खाने के चलते उनके सामने भुखमरी की समस्या आ गई। इस विपत्ति के समय में अपने गांव की याद आई।
रिक्शे पर सामान लादकर पूरा किया 600 किमी का सफर
- फोटो : amar ujala
बताया इतना पैसा नहीं था कि परिवार के पांच सदस्यों का किराया वहन कर सके। इस पर 24 मार्च को पूरा परिवार पैदल ही घर से निकल पड़ा। घर में जो राशन था वह हाथ ठेले पर रख लिया। बताया कि दिन की अपेक्षा रात में सफर करना ज्यादा आसान हो रहा था। जहां भूख लगती पड़ाव डालकर रोटी बना लेते।
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सिर पर गठरी और गोद में बच्चे को लेकर किया सफर
- फोटो : amar ujala
परिवार में पत्नी ललती, पुत्र पप्पू, बहू आरती, छोटा पुत्र महेश व दो मासूम पौत्र हैं। रास्ते में जब परिवार का कोई सदस्य थक जाता तो उसे हाथ ठेले पर बैठा लेते थे। इसी तरह संघर्ष करते हुए 500 किमी का पैदल सफर तय कर बुधवार को कस्बा आ सके। इस परिवार का जीआरवी इंटर कालेज पहुंचने पर चिकित्सकों ने स्वास्थ्य परीक्षण किया।
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बताया कैसे पूरा किया 600 किमी का सफर
- फोटो : amar ujala
साधन न मिलने पर 200 किमी पैदल चले
हमीरपुर के नायकपुरवा गांव निवासी चांदबाबू पुत्र लल्लू खान मुंबई से मानिकपुर तक ट्रेन से आया। इसके बाद साधन उपलब्ध न होने पर वह मानिकपुर से नायकपुरवा तक करीब दो सौ किमी पैदल चलकर 28 मार्च को घर आया। ग्रामीणों के कहने पर वह बांदा मेडिकल कालेज जांच कराने पहुंचा। जिसमें कोरोना निगेटिव आया है। अब वह खेतों में परिवार के साथ फसल काटने में जुटा है। वहीं क्षेत्र के भैसमरी गांव निवासी रामकुमार अपनी पत्नी अनीता के साथ नोएडा में मजदूरी करता हैं। लॉकडाउन होने से नोएडा में फंस गया। रामकुमार ने बताया कई किमी पैदल चलकर बुधवार को गांव आ सका है। प्रधान जीपी वाजपेयी ने दोनों को क्वारंटीन कर इनके ठहरने व भोजन की व्यवस्था कराई है।
हमीरपुर के नायकपुरवा गांव निवासी चांदबाबू पुत्र लल्लू खान मुंबई से मानिकपुर तक ट्रेन से आया। इसके बाद साधन उपलब्ध न होने पर वह मानिकपुर से नायकपुरवा तक करीब दो सौ किमी पैदल चलकर 28 मार्च को घर आया। ग्रामीणों के कहने पर वह बांदा मेडिकल कालेज जांच कराने पहुंचा। जिसमें कोरोना निगेटिव आया है। अब वह खेतों में परिवार के साथ फसल काटने में जुटा है। वहीं क्षेत्र के भैसमरी गांव निवासी रामकुमार अपनी पत्नी अनीता के साथ नोएडा में मजदूरी करता हैं। लॉकडाउन होने से नोएडा में फंस गया। रामकुमार ने बताया कई किमी पैदल चलकर बुधवार को गांव आ सका है। प्रधान जीपी वाजपेयी ने दोनों को क्वारंटीन कर इनके ठहरने व भोजन की व्यवस्था कराई है।