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आंखों देखी : बाढ़ के बाद गांवों में दिख रहे हैं बर्बादी के निशान, लोगों के पास न घर और न खाने के लिए राशन

Fri, 13 Aug 2021 04:35 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 13 Aug 2021 04:35 AM IST
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Live report: After the flood, the traces of ruin are visible in the villages
गांवों में भरा पानी - फोटो : amar ujala
बुंदेलखंड और सेंट्रल यूपी के जिलों में बाढ़ प्रभावित जिलों में अब बाढ़ जैसे हालात तो नहीं है, लेकिन गांवों से बाढ़ का पानी निकलने के बाद बर्बादी के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं। गांव लौट रहे लोगों के पास न घर है और न ही खाने के लिए राशन है। ऐसे में सामान्य जिंदगी को फिर से पटरी पर आने के लिए प्रशासनिक और सामाजिक संगठनों की राहत का ही सहारा है। जालौन जिले में यमुना और सिंध नदी का जलस्तर घटना शुरू हो गया है। इसके बाद अब ग्रामीणों की दुश्वारियां सामने आ रही हैं। घर गृहस्थी का सामान बर्बाद हो चुका है। रामपुरा के बिलौड़ गांव में लोगों में बीमारियां फैल रही हैं, बुखार, खांसी से ग्रामीण पीड़ित हैं। फिलहाल दूरी अधिक होने के कारण इलाज की भी सुविधा नहीं मिल पा रही है। डिकौली गांव में भी लोगों को खाने पीने के लिए परेशान होना पड़ रहा है, घरों में रखा अनाज भी भीगकर सड़ गया है। रामपुरा में जिनके घर गिरे हैं वह परिवार प्लास्टिक के तिरपाल डालकर रह रहे हैं। हमीरपुर में मंगलवार की शाम से नदियों का जलस्तर घटने लगा है।


 
Live report: After the flood, the traces of ruin are visible in the villages
गांव में घुसा पानी - फोटो : amar ujala
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लेखपाल नुकसान की रिपोर्ट तैयार करने में जुट गए हैं। विकास खंड सुमेरपुर व कुरारा के बाढ़ की चपेट में आए पीड़ितों को बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग की 71 टीमें लगाई गई हैं। सीएमओ डॉ. अशोक कुमार रावत ने बताया आठ गांवों में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव हो चुका है। साथ ही बाढ़ पीड़ितों को दवा का वितरण किया जा रहा है। दवा का छिड़काव भी किया जा रहा है। शहर में पालिका की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों में दवा का छिड़काव कराने में जुटी है। 
 
Live report: After the flood, the traces of ruin are visible in the villages
गांव में घुसा पानी - फोटो : amar ujala
इटावा में चंबल और यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आ गया है। अब बाढ़ जैसे हालात तो नहीं है, लेकिन गांवों में बाढ़ का पानी निकलने के बाद ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव लौट रहे लोगों के घर ध्वस्त  हो गए हैं। खाने के लिए राशन का भी अभाव है और जानवरों के लिए चारा नहीं है। केवल प्रशासनिक राहत और सामाजिक संगठनों का ही सहारा है। उधर, औरैया में यमुना नदी का गुरुवार शाम चार बजे जलस्तर 111.62 मीटर पर दर्ज किया गया।

 
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Live report: After the flood, the traces of ruin are visible in the villages
गांव लौट रहे लोग - फोटो : amar ujala
गांवों में जलस्तर घटने के बाद अब चारों तरफ फैली गंदगी से बीमारी के हालात बन रहे हैं। अस्ता, नौरी, सिकरोड़ी, बीझलपुर, फरिहा में कई लोग बुखार से ग्रसित हैं। जिला प्रशासन के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम गांवों में महामारी फैलने से पहले ही दवाओं का छिड़काव करा रही है। घरों में पानी भर जाने से बर्बाद हुए खाद्यान्न व भूसे की समस्या का भी कोई स्थायी निराकरण नहीं किया जा सका है।

 
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Live report: After the flood, the traces of ruin are visible in the villages
गांव के बाहर हाईवे पर लगा राहत शिविर - फोटो : amar ujala
जिससे बाढ़ प्रभावित गांवों के ग्रामीणों का संकट अभी पूरी तरह से टला नहीं है। कानपुर देहात में यमुना नदी में जलस्तर खतरे के निशान से एक मीटर नीचे आ गया। मूसानगर क्षेत्र के नयापुरवा, हलिया, चपरघटा, मुसरिया आदि गांवों के रास्ते भी खुल गए हैं। लोग अब पैदल आवागमन करने लगे हैं। प्रशासन की ओर से गांवों मेें राहत सामग्री पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। समाजसेवी भी लोगों को लंच पैकेट, खाद्यान्न आदि बांट रहे हैं। 
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